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कोरोना की जंग

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Swati Sharma
22nd Jun, 2020

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बड़ा अजीब लगता है जब कभी कभी अपने आसपास हो रही चर्चाओं को सुन कर , ऐसा महसूस होता है कि  क्या वाकई में हम विकासशील भारत से विकसित की ओर बढ़ भी रहे हैं या बस आंकड़ों और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हमे विकासशील माना  जा रहा है।  क्यों है ऐसा की आज भी कुछ लोगो की मानसिकता खुद को न देख कर बस दूसरों  में दोष निकालने तक ही सीमित  है।
आज जब सुबह सुबह दो लोगो को बात करते हुए सुना तो कुछ ऐसा ही महसूस हुआ , जब एक महाशय दूसरे सज्जन से अपने अपने गेट पर खड़े होकर बातें कर रहे थे , पहले ने कहा कि  कोरोना के मामले तो देखो भैया बढ़ते ही जा रहे है आये दिन नया मामला सामने आ रहा है लेकिन अभी तक दुनिया के बड़े बड़े वैज्ञानिक इसका टीका नहीं बना पाए।  इतने में सामने वाले सज्जन बोले अरे वो तो सही बात है लेकिन जब तक टीका नहीं बना जाता तब तक सरकार और अफसरों की जो ड्यूटी बनती है कम से कम उन्हें वो तो करना चाहिए।
पहले महाशय ने हँसते हुए कहा अरे ये सरकार भी क्या करेगी न तो अस्पतालों में व्यवस्था बना रहे हैं न ही सड़के इतनी बड़ी हैं कि सोशल डिस्टैन्सिंग को फॉलो कर पाएं इतना कहते ही महाशय ठहाके मार कर हंसने लगे हँसते हँसते ठसकी लगी तो हाँथ को मुँह पर लगाया , तभी वहा  उनका बेटा  आया - पापा मुझे १० रुपया दो ना , महाशय ने  उसी हाँथ को शर्ट पर पोंछते हुए  जेब से १० रुपया निकाल कर बच्चे को दिया , बच्चा चला गया और वह १० रुपया सामने खड़े ठेले वाले को दिया उस ठेले वाले ने वह रुपया जिस हाँथ से लिया उसी हाँथ से फल सब्ज़ी सब छुआ और लोगो के घर घर दिया भी।
दोनों महाशय और सज्जन जब सरकार और अन्य सभी में दोष निकाल कर संतुष्ट हो गये , तब दोनों ने कहा चलो अब चला जाये , बच्चे ने पापा को पूछा पापा कहा जा रहे हो , वो बोले बेंटा माँ को कहना हम चाय की  दुकान तक जा रहे हैं आज भी हम  नाश्ता वही कर लेंगे।  दूसरे सज्जन की पत्नी ने पुछा अरे कहा जा रहे हैं आज तो ऑफिस की भी ड्यूटी नहीं है तब सज्जन बोले अरे हाँ ड्यूटी नहीं तो सोचा थोड़ा बाल सेट करवा आता हु नाइ के यहाँ से। , इतना कहकर दोनों एक गाड़ी पर बैठ कर साथ साथ चल दिए।
मैं उन्हें देख कर बस यही सोच रही थी की क्या वाकई में ये देश के वो नागरिक हैं जिन्हे अपने मौलिक अधिकारों का प्रयोग करके बोलने का अधिकार तो है लेकिन देश में बह रही सोशल डिस्टैन्सिंग  की लहर  , साफ़ सफाई के विचार  , घर पर रहे स्वस्थ जैसे कोटेशन को समझने का कोई कर्तत्व  नहीं है , इतना सोच कर उन्हें ये बात समझाना ही चाहती थी  , कि तब तक वो थोड़ा दूर जा चुके थे.
मेरा आज समाज के हर व्यक्ति से देश के हर नागरिक से बस एक यही प्रश्न है कि क्या कोरोना की इस जंग में लड़ाई सिर्फ सरकार , डॉक्टरों , पुलिस आदि अधिकारियो की ही है हम आम लोगो को कोई परवाह नहीं करना चाहिए , माना कि वो हमारे असली फाइटर्स है , लेकिन हमे यह भी मालूम होना चाहिए की हम उनके हथियार हैं जो उनको सहायता कर सकते हैं उनकी बताई हुई नीतियों का पालन करके।
वे महाशय जो कोरोना मामले की बढ़ोत्तरी में सरकार डॉ. पुलिस सबको दोष दे रहे  थे उन्होंने खुद किस नियम का पालन किया  , वह बच्चा , वह सब्ज़ी वाला क्या इन सबने किसी भी नियम का ध्यान रखा, वो नियम  जो आज के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।  दुनिया के बड़े बड़े विद्वानों के लाख समझने पर भी वे कोरोना की भयावहता को न समझ कर बस इस भरोसे पर बैठे हैं की जो करेगी सरकार करेगी तो उनसे मेरा यही कहना है की समय आ चूका है जागिये अपने और अपने परिवार की सुरक्षा क लिए अब तो सजग हो जाईये। ..वर्ना  कही ऐसा न हो की कोरोना की जंग में एक वायरस के आगे इंसान हार जाये।
अपनी सोच बदले दूसरो में दोष कम निकाले खुद जितना सही कर सकते हैं करें , आपकी सुरक्षा आपके हाथ
घर पर रहे साफ़ सफाई का ध्यान रखे केवल जरूरी काम से ही बाहर जाये , मास्क लगाकर रखे बार बार हाँथ धोये और सेनेटाइस करें।आपके जीवन में आज लाया जाने वाला बदलाव ही आपके और आपके परिवार  और समाज का भविष्य के सामान्य जीवन की नीव बनेगा।
हम सब को मिलकर कोरोना पर विजय पाना है  , जल्द ही   कुछ सुधारों के साथ और कुछ अच्छी आदतों के साथ हमारा  दैनिक  जीवन नए तरीके से पुनः सामान्य रूप में वापस आएगा।

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Swati Sharma

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