Bluepadडिप्रेशन का कारण भी है ‘इंस्टाग्राम’
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डिप्रेशन का कारण भी है ‘इंस्टाग्राम’

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Poorva Shelar
22nd Jun, 2020

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हम आए दिन सोशल मीडिया का नाम सुनते रहते हैं। हरेक जगह इसको लेकर डिबेट भी होती है। आज के समय में कोई भी ऐसा नहीं है जो सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं रहता। अभी का समय आॅनलाइन का है। सभी कुछ इंटरनेट से जुड़ा हुआ है। ऐसी स्थिति में सोशल मीडिया से दूरी संभव नहीं है। सोशल होने अर्थात सामाजिक होने की सीख तो हमें बचपन से ही दी जाती है। कहा जाता है कि लोगों के साथ आमने-सामने मिलकर बात करें। अर्थात् लोगों से प्रत्यक्ष रूप से संपर्क रखे।

आज जमाना बदल गया है। परिस्थितियां बदल गई है। आज सोशल बनने का जिम्मा मीडिया ने उठा रखा है। अब लोग मीडिया के जरिए सोशल या सामाजिक बनते हैं। आज सोशल बनने के लिए मीडिया के टूल्स का उपयोग किया जाने लगा है। ये टूल्स ही सोशल मीडिया का रूप धारण कर लेते हैं। सोशल मीडिया के इन टूलसों को आप भली-भांति जानते हैं। जैसे- फेसबुक, इंस्टग्राम, ट्विटर सहित दूसरे कई सोशल मीडिया के टूल्स हैं। इन्हें हम सोशल नेटवर्किंग साइट्स कहते हैं।

सोशल मीडिया के द्वारा हम दूसरे व्यक्ति के साथ आॅनलाइन जुड़ सकते हैं। इस माध्यम के द्वारा हम लोगों  से सोशल कम्युनिकेशन करते हैं। इन सोशल साइट्स के द्वारा हम अपने वक्तव्यों को दूसरे तक पहुंचा सकते हैं। साथ ही अपने चित्र वगैरह भी भेज सकते हैं। आज सोशल मीडिया की पहुंच गांव-गांव तक हो गई है। इसका उपयोग हम बिजनेस मार्केटिंग के क्षेत्र में भी कर सकते हैं। सोशल मीडिया की विशेषताओं को नकारा नहीं जा सकता।

सोशल मीडिया जहां एक ओर अच्छी है वहीं इसके कई नाकारात्मक परिणाम भी देखने को मिलते हैं। इसकी लत बहुत ही बुरी होती इसकी लत होने पर व्यक्ति अपने परिवार के साथ समय नहीं बिताकर आॅनलाइन समय बिताते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो हम इसके गुलाम बन जाते हैं। सोशल मीडिया का प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इस मीडिया के कारण हम बहुत सी गलत चीजों को स्वीकार्य करने लगते हैं। जिसके कारण कभी-कभी जान तक चली जाती है। अधिक देर तक सोशल मीडिया पर एक्टिव होने की  आदत होने के बाद व्यक्ति को दूसरे जगह अपना ध्यान लगाने में परेशानी होती है। वह अंर्तमुखी हो जाता है। जैसे- पढ़ाई में मन नहीं लगना, खेल-कूद में दिलचस्पी ना होना, बड़ें की बातों को अनसुना करना इत्यादि।
इन्ही सोशल मीडिया में एक टूल्स है इंस्टाग्राम। इसे सोशल नेटवर्किंग ऐप भी कहते हैं। इंस्टाग्राम पर हम फोटो और वीडियो शेयर करते हैं। । इंस्टाग्राम पर लगभग एक बिलियन एक महीने के एक्टिव यूजर्स हैं। इस फीचन में  लाईक, कमेंट्स, प्राईवेट मैसेज को टैग करने की सुविधा है। इसमें स्टोरी शेयरिंग फीचर्स के द्वारा फोटो और वीडियोंज को फाॅलोवर तक शेयर किया जाता है।

एक रिसर्च के मुताबिक इंस्टाग्राम यूजर्स हीनता और हताशा कि भावना पैदा करता है। इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर करने वाले यूजर्स में अवसाद, अकेलापन जैसी बातें घर कर जाती हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के बारे में माना जाता है कि ये युवाओं के मेन्टल हेल्थ को इम्प्रूव करते हैं, लेकिन पहली बार पाया गया है कि ये सोच को नेगेटिव रूप से प्रभावित करते हैं। रिसर्च के अनुसार पता लगा कि इंस्टाग्राम के अलावा फेसबुक और स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म 14 से 24 साल की उम्र के युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इंस्टाग्राम का प्रयोग हम अपनी फोटो और वीडियो पोस्ट करने के लिए करते हैं। मगर आजकल अपनी लाइफ के हर लम्हे को इंस्टा पर पोस्ट करने लगे हैं, जो कहीं न कहीं हमारी मेंन्टल हेल्थ को बिगाड़ने के लिए काफी है।

इंस्टाग्राम का अधिक उपयोग करना खतरनाक होता है। वैसे किसी भी साोशल साईटस का अधिक उपयोग खतरनाक होता है। इंस्टाग्राम का अधिक उपयोग करने पर व्यक्ति डिप्रेशन या अवसाद की समस्या से ग्रसित हो जाता है। इसका कारण है कि लोगों की अपेक्षा रहती है कि वह जो फोटो या कोई अन्य जानकारी इंस्टाग्राम पर डाले उसकी पहुंच अधिक से अधिक लोगों तक हो। ऐसा नहीं होने पर जो व्यक्ति सोशल मीडिया पर अधिक एक्टिव रहता है वह अवसाद में चला जाता है। इस ऐप में बार-बार अपनी ही फोटो को एडिट करने से व्यक्ति का कांफिडेंस कम हो जाता है। रिसर्च के मुताबिक 90 प्रतिशत  से ज्यादा किशोर जो सोशल मीडिया पर लगातार बने रहते हैं वह भावनात्मक परेशानियों से ग्रस्त पाए गए। यही परेशानियां बढ़ कर इनके युवा होने पर गंभीर मानसिक बीमारियों का रूप ले लेती हैं।

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