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Anita pathak
Anita pathak
22nd Jun, 2020

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#सुशांतसिंहराजपूत
वो चला गया। और छोड़ गया एक सवाल "आखिर क्यों"? Bollywood की दुनिया जितनी सूनहरी है ,  उतनी ही अँधेरी गलियाँ भी हैं जहाँ तक एक आम इंसान की सोच नही पहुँच पाती है।
आज का सबसे बड़ा सवाल "ऐसा क्या #Depression था सुशांत को "?
एक बात जो मेरे ज़हन में आ रही है कि तारीफ़ सभी को अच्छी लगती है। मानो या ना मानो पर एक शब्द तारीफ़ का हमारे अंदर ऊर्ज़ा का एक नया संचार करता है , हमें और ज़्यादा मेहनत करने के लिये प्रेरित करता है।
आज हर चैनल पर सुशांत की खबरें, उनकी तारीफों के कसीदे, और उनके बेहतर कलाकार होने की चर्चा हो रही है। ये बड़ी बात नहीं है क्योंकि एक व्यक्ति अपनी मौत के बाद तारीफ़े तो बटोर ही लेता है, झूठी ही सही।
आज उनकी जिन फिल्मों के लिये उनका नाम लिया जा रहा है क्या उन फिल्मों के लिये उनको तब कोई नाम दिया गया। हर व्यक्ति कामयाबी चाहता है और उसकी निशानी भी।
हमारी फिल्म इंडस्ट्री ने हमें कई बेहतरीन फिल्में और कलाकार दिये हैं लेकिन इसी इंडस्ट्री ने कई दिग्गज कलाकारों को हमसे छिन भी लिया है और ऐसी गुमनाम मौत कि सब सोचते ही रह गए कि क्या हुआ , कैसे हुआ।
मैं किसी के खिलाफ़ या पक्ष में नहीं हुँ सिर्फ अपने विचार रख रही हुँ कि क्या एक वजह ये रही होगी सुशांत के डिप्रेशन की कि उनको वो ईनाम नही मिला उनकी फिल्मों के लिये जो कई बार " गली बाॅय" , "कबीर बेदी" , "माय नेम इज़ खान", जैसी फिल्मों के अभिनेताओं को मिल जाता है। उन्होंने जितना चाहा, उतना या वो पा नहीं सके या शायद उन्हें किसी तरह मिला नहीं।
पर , क्या ये वजह थी तो भी उनका ये फैसला सही था। क्यों सुशांत ने ख़ुद को समझाया नहीं कि ज़िन्दगी कई मौके देती है, इस बार नही तो किसी और बार सही। इतने बेहतर कलाकार , सबकुछ ना सही पर , बहुत कुछ तो पा ही रहे थे। क्या कामयाबी को सेलिब्रेट करने के लिये अवाॅर्ड इतने ज़रूरी हो जाते हैं??
और यदि कोई और वजह थी तो भी क्या वो वजह ज़िन्दगी से बढ़कर होगी? क्यों और कैसे कोई इतना कमज़ोर हो जाता है उस एक लम्हे में जहाँ वो सही - गलत का फैसला नहीं कर पाता है।
जीवन का सबसे बड़ा सत्य मौत है, जिससे हर किसी को रूबऱू होना ही पड़ता है, लेकिन ये रास्ता तो क़तई सही नही होता।
"कौन कहता है, ख़ुदकुशी कायरों का काम है बड़ी हिम्मत चाहिये होती है ख़ुद को ख़ाक करने के लिये नज़रिया एक सही हो जाए तो इसकी आधी हिम्मत लगती है ख़ुद को बुलंदी पर पाने के लिये"
आँखों में बसे सपने,और अपनों का साथ हमें जीवन के किसी भी जंग को जीतने में सहायता करता है, लेकिन हमारा आत्मविश्वास हमें ढृढ़ निश्चय और हिम्मतवार बनाता है। #BePositive #Bedetermined  #believeinyourself #staysafe
Anita Pathak
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