Bluepadतुम!
Bluepad

तुम!

Naintara mehra
Naintara mehra
29th Nov, 2021

Share

..तुम!!
जब भी आसमान घरघराता है.,
तुम याद करते हो .,,
या ये सिर्फ़ मुझे डराता है ।
..जब भी धीमी सी आहट होती है,
तुम दबे पाँव आते हो,,
या तुम युँ ही मुझे जगाते हो.।।
..जब भी बेवक्त बारिश ☔️ बरसती है .,
तुम तर- तर आंसू बहाते हो.,
कहीं ऐसा तो नहीं,?
कि तुम सिर्फ़ मुझे सताते हो.।
.. कभी कभी धूप तेज़ हो जाती है
तुम दूर बैठे ग़ुस्सा हो? या युँ कहू .,,
कि तुम ज़ोरों से मुझे धमकाते हो.।
..कभी रंगीन पतझड़ देख ख़याल आता है
तुम मुझपे मरते हो.,
कहीं टूट ना जाए ग़ुरूर तुम्हारा..,,
इसी कश्मकश में उलझे रहते हो.।।
..तुम रमज़ान का महीना हो.,
और मैं हर शाम इफ़्तारी सा.,,
कुछ ख़ास फ़र्क़ नहीं हम दोनों में.,
तुम हर दिन की पहली नमाज़.,
..और मैं ईशा की तैयारी सा .।।
...मैं मौसम हैरान सा,
और बदलते मिज़ाज तुम्हारे बादल जैसे हैं.,
बस रत्ती भर ही अलग हैं तुमसे.,
वरना मेरे भी मसले तुम जैसे हैं.,,
तुम पूरा एक रुप्पया.,मेरे तो मोल बस कुछ पैसे हैं.।
बस तुम पंछी बन उड़ आओ.,हम बिखरे आसमाँ से बैठे हैं.।। N.mehra✍
-----------------

14 

Share


Naintara mehra
Written by
Naintara mehra

Comments

SignIn to post a comment

Recommended blogs for you

Bluepad