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अतुल अहसास
21st Jun, 2020

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एक ऊँगली
थामे जब चलने की कोशिश
तो यह विश्वाश की कोई थामे है
नही गिरूंगा .......
जिंदगी की दौड़ में
लड़खड़ाए कदम
तभी कंधे पर हाथ
कदमो का सम्भल जाना
किसी का संबल मिलते ही......
जब जब मन व्यथित हुआ
व्याकुल मन की उथलपुथल
तभी एक आवाज ने
सब कुछ शांत कर दिया
मैं हूँ ना
बस सब बलाए दूर......
संबल,विश्वाश का नाम
पिता का साथ

अहसास

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अतुल अहसास

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