Bluepadआसान नहीं है सुबह में मिलने वाली‘कॉफी’
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आसान नहीं है सुबह में मिलने वाली‘कॉफी’

Amrut bhosale
Amrut bhosale
27th Apr, 2020

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जब कोई सुबह-सुबह कॉफी का प्याला देता है तो सुबह अच्छी बन जाती है। सुबह हो या शाम कॉफी दिन को पूरा कर देता है। आप बाहर से थककर आए और आपको सामने कॉफी का मग दिख जाए तो इससे अच्छा क्या हो सकता है। भारत में चाय के साथ- साथ कॉफी पीनेवालों की भी अच्छी संख्या है। ठंड के मौसम में बाहर बारिश हो रहा और घर में गर्मा-गर्म पकौड़े और कॉफी मिल जाए तो ठंड का मौसम और अधिक सुहाना हो जाता है। ऐसा नहीं है कि कॉफी का चिकित्सकीय महत्व नहीं है। ऐसा कहा जाता है कि बीपी कम होने पर काॅॅफी लेना सही होता है।

भारत ने डेढ़ सौ वर्षों से भी अधिक समय के लिए उत्तम गुणता की कॉफी के अनोखे प्रकार का निरंतर उत्पादन तथा निर्यात किया है। जो कॉफी आपकी सुबह को अच्छी बनाती है उसके एक कप के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है इसकी जानकारी संभवतः ही आपको हो। कई पैमानों से उतारने के बाद ही एक कप कॉफी का बेहतरीन स्वाद आपको चखने को मिलता है। आज हम बात करतें हैं कर्नाटक के कूर्ग में तैयार होनेवाली अरेबिका कॉफी की जिसे भारत सरकार द्वारा भौगोलिक पहचान (जीआई) प्रदान की गई है।

कुर्ग अरेबिका कॉफी का उत्पादन मुख्यतरू कर्नाटक के कोडागू जिले में होता है। यहां हरे-भरे कॉफी बागान हैं जो हनीबियों से भरे हुए हैं जो कि लोकप्रिय कूर्ग हनी के उत्पादन का कारण बनते हैं। ये आदिवासियों द्वारा इकट्ठे किए जाते हैं। लगभग 750-1100 मीटर की ऊंचाई पर, इस क्षेत्र में लगभग 1000-2500 मिमी औसत वर्षा होती है।

सबसे पहले खेत की तैयारी की जाती है। कॉफी की खेती अधिकतर पहाड़ी भूमि पर की जाती है। खेत की अच्छे से जुताई कर और रोटावेटर की मदद से भुरभुरा बनाया जााता है। फिर भूमि को समतल बनाया जाता है। खेत की जुताई के बाद खेत में पंक्तियों में चार से पांच मीटर के आसपसा दूरी रखकर गड्ढ़ा तैयार किया जाता है।

कॉफी के पौध को तैयार करने में काफी मेहनत और समय लगता है। कॉफी की पौध कलम के माध्यम से तैयार की जाती है। कलम के माध्यम से पौध तैयार करने की प्रक्रिया में दाब, गूटी और ग्राफ्टिंग विधि का इस्तेमाल किया जा सकता है। कॉफी के पौधे खेतों में गड्ढ़े तैयार कर उनमें लगाए जाते हैं। इन तैयार गड्ढों में पौध को लगा चारों तरफ से अच्छे से मिट्टी डालकर दबा दिया जाता है। इन पौधों के लिए छाया की जरूरत होती है इसलिए इनके बीच-बीच में छायादार वृक्ष की रोपाई की जाती है।

कॉफी के पौधों की सिंचाईकॉफी के पौधे को खेत में लगाने का सही समय शरद ऋतु के समाप्त होने पर और ग्रीष्म ऋतु के शुरू होने का होता है।कॉफी के पौधों की सिंचाई, उर्वरक की मात्रा, खरपतावार नियंत्रण, पौधों की देखभाल, पौधों में लगनवाले रोगों पर भी विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। कॉफी की खेती में तापमान का एक खास महत्व है। कॉफी की पौधा 18 से 20 डिग्री के तापमान पर अच्छे से विकास करता है। लेकिन गर्मियों में अधिकतम 30 डिग्री और सर्दियों में न्यूनतन 15 डिग्री तापमान को भी सहन कर सकता है।

इन फलों की तुड़ाई अक्टटूबर से जनवरी में की जाती है। अरेबिका प्रजाति के पौधों का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 1000 किलो के आसपास होता है।कॉफी के पौधे फूल लगने के 5से 6 महीने बाद पैदावार देना शुरू कर देते हैं। इसके फल शुरूआत में हरे दिखाई देते। धीरे-धीरे इनके रंग में परिवर्तन आता है। पूर्ण रूप से तैयार फल लाल रंग का दिखाई पड़ता है।

कर्नाटक की कुर्ग अरेबिका कॉफी बहुत अच्छी होती है। यही कारण है कि वाणिज्य मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने कुर्ग अरेबिका कॉफी को जीआई प्रदान किया है।

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