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कलम लहू मांगती है!

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Rakesh Berwal
21st Jun, 2020

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कलम भी लहू मांगती है, यह काम इतना भी आसान नहीं होता !मत खोलना सबके सामने अपने दिल को, क्योंकि हर शख्स तबीयत से नादान नहीं होता !डूब जाते यह सारी दुनिया अंधेरे में, जो ये मां नहीं होती तो ये जहां नहीं होता !मत झुकते फिरो हर किसी के सामने , क्योंकि हर शख्स भगवान नहीं होता !कट चुके हो जिनके पंख जन्म से ही , उन परिंदों के लिए कोई आसमान नहीं होता !जीते हैं कुछ लोग साफ दिल से भी जिंदगी, सभी को जिस्म और दौलत का अरमान नहीं होता !पलट जाते हैं अपने बयान और दल से , इन राजनेताओं का कोई ईमान नहीं होता !अपनी गलती मानो और माफ करना भी सीखो बिना इस गुण के इंसान इंसान नहीं होता !जरूरी तो नहीं कि हर जख्म दिखाई ही दे , कुछ चोटों का कोई भी निशान नहीं होता !सारी उम्र गुजार देती है ये औरतें परिवार की खातिर, क्यों इनके लिए कभी कोई इनाम नहीं होता !जो पता होता कि राकेश इतना दर्द देगी जिंदगी, मैं तो बच्चा ही रहता कभी जवान नहीं होता!

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Rakesh Berwal

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