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क्या आप जानते हैं ‘कोडिंग’ !

Amrut bhosale
Amrut bhosale
25th Apr, 2020

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कुछ समय पहले मीडिया में खबर आई थी कि चीन छोटे बच्चों को कोडिंग सीखा रहा है। ऐसा भी सूनने में आया कि जिस उम्र में हमारे बच्चे गणित, संगीत, नृत्य की शिक्षा लेते हैं उस समय में चीन अपने बच्चों को कोडिंग सीखा रहा है। इसकी आलोचना भी हुई। चीन के बच्चे कोडिंग सीखते हीं नहीं बल्कि सिखाते भी हैं। यही कुछ कारण है कि चीन, अमेरिका, जापान और यूरोपीय देशों को चुनौती दे रहा है।
भारत जैसे देशों में यह चर्चा हुई कि जिस कोडिंग को यहां बड़े होने पर किया जाता है आखिर चीन वहां अपने बच्चों से इतनी कम उम्र में यह क्या करवा रहा है। बहुतों ने यह तक कह दिया कि अगर बच्चे इतनी छोटी उम्र में कोडिंग के मास्टर बन जाएंगे तो बड़े होकर वे क्या करेंगे इसका अदांजा लगा पाना मुश्किल है। आज हम बात उसी कोडिंग को लेकर करते हैं।
आज का युग कंप्यूटर का युग है और आनेवाला समय इससे भी एडंवास होगा। कहने का तात्पर्य है कि सभी चीज कंप्यूटर पर ही आधारित होगा। उस स्थिति में कोडिंग की आवश्यकता होगी। कोडिंग कंप्यूटर प्रोगामिंग की भाषा है। आप किसी प्रोग्राम को उस भाषा में कोड कर सकते हैं, उसे चला सकते हैं। अगर उसमें कोई समस्या आती है तो सही भी कर सकते हैं। यही कोडिंग कंप्यूटर के समस्याओं का समाधान भी करती है और समस्याएं पैदा भी करती है।
कभी-कभी ऐसा सुनने में आता है कि कंप्यूटर को हैक कर लिया गया है। ये हैकर्स भी उसी कोडिंग का सहारा लेकर कंप्यूटर को हैक कर गलत कामों को करते हैं। उस हैकिंग की परिस्थिति से निपटने के लिए आवश्यक है कि कोडिंग की उस भाषा को सीखकर उसका तोड़ निकाला जाए।
आनेवाले समय में कोडिंग नौकरी के क्षेत्र में बड़ा विस्फोट करनेवाली होगी। यही कारण है कि आजकल भारत में भी बच्चों के कोडिंग सीखने पर विचार किया जाने लगा है। आज माता-पिता बच्चों के इस स्किल को आगे बढ़ाने में लगे हुए भी हैं।
यह कोडिंग बच्चों को रचनात्मक बनाती है। उनके पास कुछ ऐसा डिजाइन करने का मौका होगा जो पूरी तरह से उनका स्वयं का हो। अगर हम चाहते हैं कि बच्चे अपने पढ़ाई में सफलता में हासिल करें तो आवश्यक है कि उन्हें कोडिंग सीखना पड़े। बच्चों के लिए कोडिंग न केवल उनके गणित और लेखन कौशल को बेहतर बनाने में मदद करता है, बल्कि उन्हें नौकरी के क्षेत्र में भी कुशलता प्रदान करता है। यही कारण है कि आज विभिन्न कारणों से कोडिंग सीखना महत्वपूर्ण है और कम उम्र से स्कूलों में कोडिंग क्यों सिखाई जानी चाहिए।
कोडिंग की अपनी एक भाषा होती है। वर्णमाला के प्रत्येक अक्षर में 0 और 1 का एक विशेष सूत्र है जो इसका प्रतिनिधित्व करता है। ये 0 और 1 हमारे आसपास की तकनीक को निर्देश देते हैं कि कैसे प्रदर्शन किया जाए। यह कोडिंग तकनीकों को बोलने के बजाय संचालित होती है। यह कोडिंग बच्चों को तकनीकि ज्ञान देती है।
प्रयोग करने से, बच्चे अपने दिमाग को सीखते हैं और मजबूत होते हैं। जब वे गलती करते हैं तब भी वे सीखते हैं। बच्चे रचनात्मक हो सकते हैं और रचनात्मकता को प्रोत्साहित किया जाता है। रचनात्मकता प्रक्रिया का हिस्सा है और हमेशा उत्पाद नहीं। कोडिंग से मैथ स्किल वाले बच्चों को मदद मिलती है।
कोडिंग के कारण बच्चे जो कोड करना सीखते हैं वे समझते हैं कि विचारों को कैसे योजना और व्यवस्थित करना है। यह बेहतर लेखन कौशल पैदा कर सकता है जो समय के साथ कोडिंग कौशल विकसित होने पर बनाया जा सकता है। कोडिंग सीखने के दरम्यान अगर वे असफल होते हैं तो वे उसमें सुधार भी करते हैं।
कोडिंग डिजिटल युग में एक बुनियादी साक्षरता है, और बच्चों को उनके आसपास की तकनीक के साथ काम करने और समझने में सक्षम होना महत्वपूर्ण है। इतना ही नहीं बात अगर नौकरी के क्षेत्र की करें तो आनेवाला समय इसी कोडिंग की भाषा पर निर्भर होनेवाला है।

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