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छात्र जीवन में ‘शिक्षक’ का स्थान भगवान के बराबर

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Paritosh Lad
20th Jun, 2020

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एक छात्र के जीवन में शिक्षक का स्थान भगवान के बराबर माना गया है। इस बात को स्पष्ट करता हुआ गुरु कबीर का एक दोहा आज भी विश्व विख्यात है कि-
‘गुरु गोविन्द दोऊ खड़े,काके लागूं पाय।बलिहारी गुरु आपने,गोविन्द दियो बताये’।

शिक्षक का अर्थ होता है शिक्षा देने वाला परन्तु यह केवल शाब्दिक अर्थ है क्योंकि शिक्षा का महत्व इससे भी कहीं ज्यादा है। शिक्षा देकर ही शिक्षक का कर्तव्य नहीं खत्म होता है बल्कि वह एक कुशल नागरिक बनाने में शिक्षक का प्रमुख योगदान होता है। वह शिक्षक ही होते हैं जो बच्चों को सही मार्ग पर चलने के लिए राह दिखाते हैं।

शिक्षक भगवान द्वारा दिया गया एक सुंदर उपहार होता है। जो हमेशा से ही बिना किसी स्वार्थ और भेद-भाव रहित व्यवहार से बच्चों को सही-गलत और अच्छे-बुरे का ज्ञान कराता है। प्रत्येक समाज में अध्यापक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है क्योंकि समाज उन्हीं बच्चों से मिलकर बनता है जिनको परिपक्व कर समाज में श्रेष्ठ इंसान बनाने की जिम्मेदारी अध्यापक की ही मानी जाती है। एक शिक्षक भगवान की तरह होता है क्योंकि भगवान पूरे संसार का निर्माता होता है और एक शिक्षक अच्छे राष्ट्र का निर्माता होता है। एक विद्यार्थी के जीवन में शिक्षक एक ऐसा महत्वपूर्ण प्राणी होता है जो अपने ज्ञान, धैर्य, प्यार और देख-भाल से उसके पूरे जीवन को एक मजबूत आकार देता है।

किसी व्यक्ति के जीवन मे शिक्षक उसके भविष्य का निर्माता होता है। शिक्षक के द्वारा ही हमारे अंदर नैतिकता, शांति, एकता ,अखण्डता आदि के गुण भरे जाते है। और हम इन्ही गुणों के द्वारा अछे नागरिक बनते है। जिससे हमारे जीवन मे वसुधैव कुटुम्बकम की भावना जगती हैं  और हम सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार की भांति मानते है। हमारे अंदर ऐसे गुणों की जागृति होती हैं। इस हम अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए राष्ट्र की प्रगति की विषय मे सोचते है।
हमारे जीवन के हरेक कदम पर शिक्षक की जरूरत होती है। यह शिक्षक किसी भी रूप में होते हैं। कभी यह शिक्षक मां की भूमिका में होते हैं कभी पिता की भूमिका में। कभी यह विद्यालय के शिक्षक की भूमिका में होते हैं कभी काॅलेज के शिक्षक के रूप में। इतना हीं नहीं हमारे आम जीवन में कई बार कई लोग शिक्षक की भूमिका में होते हैं।

कहा जाता है कि बच्चा का प्रथम विद्यालय परिवार होता है और परिवार का हरेक सदस्य शिक्षिक की भूमिका निभाता है। एक मां अपने बच्चों को जीवन की प्रारंभिक शिक्षा देती है। वह मां ही होती है जो बच्चे को सही-गलत का बोध करवाती है। उसके बाद बच्चा विद्यालय जाना प्रारंभ करता है उस समय विद्यालय के शिक्षक उसका मार्गदर्शन करवाते हैं।
शिक्षकों को आदर देने के लिए हरेक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इस दिन योग्य शिक्षकों को सरकार द्वारा सम्मानित किया जाता है। राष्ट्र उन सभी शिक्षकों को सम्मानित करता है जो अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाने में हमारी सहायता करते हैं। एक शिक्षक ज्ञान रूपी सागर होता है हमें जितना उनसे जब तक हो सके किसी-न-किसी विषय के बारे में ज्ञान प्राप्त करते रहना चाहिए।

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