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कातिलों के झुंड पे आधी सास भारी है
niru krishika
niru krishika
17th Jan, 2023

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बराबरी का सामंजस्य नहीं
जूदाई का विकल्प सच्चाई सही
विभिन्नताऐं विचारों में फर्क बढ़ता हुआ
दरारें गहरी खाई जानलेवा बेपरवाह
मिटाने का जज्बा ए जूनून का सिला
कातिले हमलावर से
एतबार को आखिरी सांस तक गिला
जज्बाये होसलाअबजायी
डुबते -डुबते सही
हाथों से हाथ हैं कि
छुराये से छुटते कहां
कातिलों के झुंड पर
आधी सांस भारी है l
- नीरू कषिका l

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