Bluepadशिक्षा को मजेदार बना रहा ‘बायजूस’
Bluepad

शिक्षा को मजेदार बना रहा ‘बायजूस’

Anjela Pawar
Anjela Pawar
24th Apr, 2020

Share


आज डिजीटल युग है। सभी काम डिजीटली होते हैं। इस डिजीटल क्रांति में हमारी मोबाइल ने जबरदस्त भूमिका निभाई है। आज हम कहीं भी रहे हमें समाचारों, बालीवुड की खबरों के लिए टीवी, रेडियो पर आश्रित नहीं रहना पड़ा। इन सभी की जानकारी हम अपने स्मार्टफोन से ले सकते हैं। इतना हीं नही ंहमे कहीं जाना हो तो हमारे मोबाइल के ऐप वहां जाने के लिए रास्ता बताने तक में भी हमारी मदद करते हैं। ऐसे बहुत से काम हैं जा आजकल डिजीटली हो रहे हैं। हमें अब किसी भी कार्य के लिए किसी पर आश्रित होने की आवश्यकता नहीं है। जब इतने सभी चीजों को हम डिजीटली कर रहे हैं, तो जब हमें इस स्मार्टफोन में पढ़ाई करने को मिले तो फिर यह तो ‘सोने पर सुहागा’ वाली बात हो गई। साथ ही यह पढ़ाई उबाऊ ना होकर दिलचस्प हो तो उस ओर ध्यान जाना तो अवश्यभावी है। आजकल स्मार्टफोन द्वारा पढ़ाई करने की क्रांति में ‘बायजूस’ प्रमुख भूमिका निभा रही है। यह लर्निंग ऐप छात्रों को ऑनलाइन ट्यूशन प्रदान करता है।
अधिकतकर बच्चों को गण्ति और साइंस की पढ़ाई बहुत बोझिल लगती है। कभी-कभी तो यह देखा जाता है कि इन विषयों की पढ़ाई बच्चे सिर्फ परीक्षा पास होने के लिए करते हैं। अर्थात उन्हें परीक्षा पास करने नंबर मात्र से मतलब है। इसका परिणाम यह होता है कि वे बच्चे जब बड़े होते जाते हैं उनका यह डर बना रहता है। इस कारण से वे आगे उन विषयों से संबंधित पढ़ाई नहीं कर पाते। इतना हीं नहीं उन विषयों पर बात करने तक से डरते हैं। लेकिन अब इस डिजीटल युग में ‘बायजूस’ ने बच्चों के इसी डर को समझा है। ‘बायजूस’ के संस्थापन बायजु रविंद्रन का कहना है कि अगर स्कूल में बच्चों को मैथ्स और साइंस जैसे बेसिक सब्जेक्ट्स की पढ़ाई दिलचस्प तरीके से कराई जाए तो उनके सफल होने के अवसर ज्यादा होते हैं। स्टूडेंट्स को उनके शुरुआती वर्षों में बेहतर तरीके से सिखाने से आप बड़ा असर डाल सकते हैं।
‘बायजूस’ छठी से बारहवीं क्लास के बच्चों के लिए प्रोग्राम चलाती है। यह ग्रेजुएट्स को कैट, आईएएस, जीआरई और जीमैट जैसे कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी में भी मदद करती है। यह केवल थिअरी पर नहीं, बल्कि विजुअल और कॉन्टेक्सचुअल लर्निंग पर जोर देती है। यह इसके लिए टेक्नॉलजी और डेटा का इस्तेमाल किया जाता है। इस ऐप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस ऐप के द्वारास्टूडेंट्स को यह पता लगाने में मदद मिलती है कि क्या सीखना है, कब सीखना है, कैसे सीखना है और कितना सीखना है। ऐसा नहीं है कि हम बस सीखते जा रहे हैं। हरेक स्थान पर यह बताती है कि हमें किन चीज की जरूरत है।
‘बायजूस’ की इन्हीं खूबियों के कारण उम्मीद की जा रही है यह पहली नंबर की लर्निंग ऐप बन जाएगी। ‘बायजूस’  ने क्लासरूम टीचिंग के साथ शुरुआत की थी और अब यह एक एजुकेशन टेक्नॉलजी कंपनी के तौर पर उभर रही है, जिसका फोकस ऑनलाइन ऑपरेशंस पर हैं। 2015 में लर्निंग ऐप को लॉन्च किया गया। ऐप ऑरिजिनल कॉन्टेंट, वॉच-ऐंड-लर्न वीडियो, ऐनिमेशंस और इंटरऐक्टिव सिम्युलेशंस ऑफर करती है और इससे स्टूडेंट्स को आसान और मजेदार तरीके से सीखने में मदद मिलती है।
ऐप में कुछ कॉन्टेंट मुफ्त ऑफर किया जाता है, जबकि अडवांस लेवल्स के लिए स्टूडेंट्स को फीस चुकानी होती है। इस ऐप का अब 40 लाख स्टूडेंट्स इस्तेमाल कर रहे हैं और इनमें से 1.6 लाख पेड सब्सक्राइबर्स हैं। ऐप के साथ हर महीने लगभग 25,000 यूजर्स जुड़ रहे हैं। मुफ्त की सर्विस होने के बाद भी इतने बउ़ी संख्या में पेड सब्सक्राइबर्स का होना इसकी लोकप्रियता को साफ दिखाता है। इसके संस्थापक रवीन्द्रन ने बताया, ‘बच्चे जब यह देखते हैं कि सीखना कितना मजेदार और आसान है तो वे खुद सीखना शुरू कर देते हैं।’ मतलब अब माता-पिता को पढ़ाई के लिए दवाब डालने की कोई आवश्यकता नहीं होती।
इस ऐप के कुछ फीचर्स विद्यार्थियों को बहुत आकर्षित कर रहे हैं। इसमें आप अपने जरूरत के हिसाब से चुनाव कर उपयोग कर सकते हैं। इसमें आपको अपनी जरूरत के हिसाब से वीडियो मिल जाए किसी भी परीक्षा की तैयारी की टेस्ट भी दे सकते हैं। इसका सकारात्मक पक्ष यह होता है कि विद्यार्थी को इसका परिणाम तत्काल मिल जाता है। इस कारण से विद्यार्थी में जिज्ञासा बढ़ती जाती है। हम देखते हैं कि किसी भी परीक्षा को देने के बाद व्यक्ति को परिणाम जानने की बहुत इच्छा रहती है। यही इच्छा जब तुरंत पूरी हो जाए तो फिर क्या कहना।  बायजस कुछ ही समय में 10 प्रमुख लर्निग ऐप में शामिल हो गया है। वह दिन दूर नहीं जब बायजस पहले नंबर के पायदान पर आ जाए।

4 

Share


Anjela Pawar
Written by
Anjela Pawar

Comments

SignIn to post a comment

Recommended blogs for you

Bluepad