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Shaadi kya hai?

Mere mann ki Baat....
Mere mann ki Baat....
18th Jun, 2020

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शादी क्या है? शादी क्या है इसका मतलब हर इंसान के लिए अलग अलग होगा आप पूछेंगे क्यों पर्सन टू पर्सन मीनिंग चेंज क्यों होगा वह इसीलिए की शादी किसके साथ हुई ,किन परिस्थितियों में हुई है ये सब और बहुत सी बातें भी इस का कारण हो सकती हैं! मैं कभी भी जॉइंट फैमिली में शादी नहीं करना चाहती थी ,आप यह भी कह सकते हैं कि मैं शादी ही नहीं करना चाहती थी इसका एक कारण मेरे मां-बाप की शादी भी इक कारण थी मैंने बहुत छोटी उम्र में ही यह सीख लिया था कि पैसा जरूरी है आदमी के लिए और औरत के लिए भी. औरत के लिए भी कमाना उतना ही जरूरी है ना सिर्फ घर को अच्छे से चलाने के लिए बल्कि अगर औरत अपना स्वाभिमान बनाए रखना चाहती है तो उसे कमाना ही चाहिए! मेरी मां भी बहुत एक्टिव और कैरियर ओरिएंटेड थी पर मेरे पिताजी पुराने जमाने के आदमी शायद इसीलिए क्योंकि उनकी मां यानी मेरी दादी उन्हें बचपन में छोड़ कर चली गई थी और वह अपने पापा और अपने६ बड़े भाइयों के साथ ही रहे तो औरत को समझ नहीं पाए या समझना नहीं चाहते थे! बचपन से घर में बड़े भाइयों और पापा का प्रभुत्व और सख्ती देखी और वह भी बचपन में ही सीख गए कि पैसा जरूरी है और अपनी अलग सोच के कारण अपनी पढ़ाई और शादी की और अपने पैरों पर खड़े हो गए! भगवान का कर्म देखो  भाइयों से कोई फाइनेंसियल और इमोशनल है ना मिलने पर भी सब भाइयों से अच्छी शिक्षा और कैरियर पाया पर वह भी मार खा गए शादी कर ली , और वह भी एक करियर ओरिएंटेड औरत से ! एक के बाद एक हम चारों भाई बहन आ गए मम्मी की गोदी में बेचारी जो शादी से पहले अपने पिताजी यानी मेरे नाना जी का बेटा बनकर रही, उनके टेलरिंग के काम में पूरी शिद्दत से अपना हाथ बताया और आईटीआई में अच्छे अंकों से पास हुई और यह सपना देखा कि गवर्नमेंट टीचर बनूंगी , बैठ गई बेचारी हम चारों को लेकर घर में और लग गई हम चारों की देखभाल करने में! ऐसा नहीं कि माँ को हम चारों प्यारे नहीं थे पर हां वह उतना ही प्यार अपने करियर से भी करती थी पिताजी को बोला कि सभी सहेलियों ने गवर्नमेंट टीचर के फॉर्म भर दिए हैं तो यह मेरा फॉर्म भी जमा करवा देना, हां कह कर पिताजी ने फॉर्म तो ले लिया पर उस फॉर्म को फाड़ दिया और वह बेचारी इंतजार करती रही कि सब सहेलियों की जॉब का बुलावा आ गया पर मैं इतनी अव्वल होने के बाद भी सेलेक्ट नहीं हुई! ! बेचारी मेरी मां उसने बहुत हाथ-पैर मारे कि कुछ जिंदगी में करूं और जो उसके अंदर आग थी कुछ कर दिखाने की, अपने पैरों पर खड़े होने की , अपना नाम दुनिया में करने की बहुत कोशिश की माँ ने पर पिताजी ने कभी उसकी तरफ मदद का हाथ नहीं बढ़ाया ! मां पापा में बहुत झगड़े होते ,मां भी लड़ाई में अपना बचाव करती पर बेचारी चाह कर भी पापा और घर को छोड़कर नहीं जा सकता है शायद उस डर से कि लोग क्या कहेंगे या हम चारों के चेहरे सामने आ जाते होंगे ! मां भी गलत होती थी बहुत जगह पर मैंने कभी भी पापा को मां को प्यार से समझाते हुए नहीं देखा ! ! हमारा बहुत बड़ा परिवार है छह ताऊजी दो बुआ उनके बच्चे इतना कि परिवार में कोई शादी या उत्सव होता तो हमसब परिवार वाले ही बहुत होते थे और किसी को बुलाने की जरूरत नहीं होती थी ! छुट्टियों में जब भी हम अपने ताई जी ,चाचा जी के घर जाते तो चाची और ताई मजा लेते हुए बोलती अरे बच्चों क्या अभी भी तुम्हारे मां बाप लड़ते हैं और मैं छोटी सी प्यारी सी मुस्कान के साथ बोलती नहीं नहीं है ना ही झगड़ते हैं शायद मैं बचपन में ही बड़ी हो गई थी ऐसा नहीं कि मेरे पिताजी बहुत बुरे इंसान है मेरे पिताजी भी अच्छे इंसान हैं पर उन्होंने कभी भी उन्होंने चोट देने के बाद प्यार से नहीं सहलाया! यही गलती उन्होंने की ! दादी नहीं थी तो ताऊ जी या बुआ जी कभी भी आती तो मां को ही गलत ठहरा जाती और सहन करने की महान सलाह दे जाती! और बुआ तो पापा के कानों में 5-7 मिर्ची लगी बातें भी बोल जाती ताकि हमारा बचा खुचा जीवन भी जहन्नुम बन जाए ! पर मेरी मां बहुत स्ट्रॉन्ग और सख्त औरत है सब झेला हम चारों को पाला बहुत बार पापा ने फेलियर शब्द से नवाजा मम्मी को पर मम्मी ने हमें जो सिखाया उस सब बातों को हमने कभी नहीं भुलाया ! पापा ने बड़े भाई को नालायक मां की नालायक औलाद बुलाया मेरा वही नालायक भाई 10th मे मेरिट के साथ पास हुआ ! पर मां को कभी शाबाशी की थपकी नहीं दी हां पर हमारी छोटी सी गलती के लिए मां को गाली गलौज का गिफ्ट देना कभी नहीं भूले ! फिर हम सभी इन्हीं हालातों में बड़े हो गए! तीन बच्चों की शादी हो गई छोटा भाई को कुवारा है वह शादी नहीं करना चाहता सब उसके पीछे पड़े हैं शादी कर ले, घर बसा ले ! पर कहीं शायद वह भी बचपन के कड़वे पल नहीं भुला पाया और मुझे कोई लड़की पसंद नहीं है यह फालतू सा बहाना बनाता रहता है ! मैं भी कभी शादी नहीं करना चाहती थी शायद बहुत हद तक मेरा कारण भी भाई से मिलता झुलता था कि कौन संभाले शादी की जिम्मेदारी हो गई ! पर न न करते करते हो गई शादी मैंने यह नहीं कहती कि मेरी शादी जबरदस्ती हुई है या मेरी मर्जी से नहीं हुई मैंने कई बार मना किया पर शायद उस वक्त ऑप्शंस कम थी या हम इतने एडवांस नहीं थे कि मां बाप के ऊपर उठकर फैसले ले सके पर इसने मेरा भाई सफल हो गया थैंक गॉड ! मुझे मिली जॉइंट फैमिली जो मैं कभी नहीं चाहती थी , फैमिली बहुत अच्छी है कोई नेगेटिव बात मत सोचो ! पर मैं खुद को जानती थी कि मेरा स्वभाव ऐसा नहीं है कि मैं एडजस्ट कर सकूं ,क्योंकि सहने की सीमा तो बचपन में ही खत्म हो गई थी ! आप मानोगे 27 साल में मेरी शादी हुई और शादी के एक रात पहले मेरे पापा का एक जोरदार चांटा खाया मैंने ! वैसे तो पूरी उम्र थप्पड़ खाए पर 27 साल में भी थप्पड़ पड़ सकता था सोचा नहीं था तथा उनसे उस दिन में पहली बार पापा के सामने चीख कर बोली ! एक्चुअली मम्मी पापा किसी बात पर लड़ रहे थे जो उनके लिए नॉर्मल बात थी! मैंने इतना ही बोला कि अब तो मैं भी जा रही हूँ एक्चुअली उस टाइम घर में अकेली मैं थी क्यूंकि छोटा भाई पहले ही चला गया था मुंबई नोकरी करने ! तो मैंने कहा कि अब तो शर्म करो अब तो मैं भी कल चली जाऊंगी बस इतना कहना था कि पापा ने जड दिया मुंह पर चांटा! उस रात को 12:00 बजे अपने होने वाले पति को फोन किया रोते-रोते सब कह दिया उनका जवाब सुनकर दिल शांत हुआ और मैं सो गई ! उन्होंने यही बोला कि शादी के बाद तुझे यहां आना है अपने तरीके से रहना ! शादी भी बिना लड़ाई के कहां पूरी होने वाली थी ! नालायक लड़का , नालायक बच्चे के शब्दों के बीच हो गई मेरी शादी ! अब मैं भी अपनी मां की बेटी थी उसी की तरह करियर ओरिएंटेड , स्वाभिमानी ! ससुराल में आते ही समझा दिया गया कि जल्दी जल्दी घर में पोता पोती खेलने चाहिए मैंने भी सोचा क्यूंकि नरम दिल था अपनी मां के जैसा तोसोचा बुजुर्ग सास-ससुर है तो चलो करियर को एक दो साल के लिए थोड़ा आगे धकेल देते हैं !  शादी के 3 महीने बाद ही खुशखबरी आ गई और शादी की पहली सालगिरह से पहले ही अपनी बेटी का जन्मदिन भी बना लिया ! पूरी प्रेगनेंसी नरक के समान थी ! पानी भी उल्टी बन निकल जाता था. इतनी उल्टियाँ हुई कि खून तक आने लगा मुंह से ! पर ऐसा शाएद सभी सहती है ! बेटी 2 साल की हुई तो सोचा नौकरी कर लो ,5 महीने नौकरी की तो बेटे आने की खबर आ गई और ससुराल में सिर्फ यही सुनने को मिलता था कि यह आठ-दस हजार की नौकरी छोड़ो अपने बच्चे पालो. जब तक बेटा फर्स्ट क्लास में हुआ तब तक प्राइवेट जॉब छोड़े भी बहुत टाइम हो गया था और मैं आउटडेटेड हो चुकी थी प्राइवेट सेक्टर की जॉब के लिए ! मैंने अपना कैरियर छोड़ दिया ! जिन्दगी चलती रही कभी ससुराल की तरह से कुछ मेरी तरफ से एडजस्टमेंट एडजस्टमेंट एंड एडजेस्टमेंट होती रही!  हस्बैंड बहुत अच्छे हैं तो चलती रही जिंदगी पर टाइम के साथ-साथ हसबंड और मेरे विचारों में भी डिफरेंस आने लगे ! मेरी तरफ से भी बहुत कमियां रही पर यह सब कमियां
मैं जानती थी बहुत कोशिश की उन्हें कम करने की ! कोशिश में कहीं कमी रह गई होगी ,बच्चे बड़े होने लगे उनकी डिमांड की वजह से , कभी उन्हें हर मुंह मांगी चीज़ देने पर डिफरेंस होने लगे !  सोचा कि  शायद ससुराल वाले कोई सलूशन दे , तो हमेशा पूरे ससुराल को हस्बैंड की तरफ खड़े पाया हर लड़ाई चाहे हम दोनों की गलती होने पर भी दोषी मुझे बनाया गया और साइड कर दिया गया !जब कोई लड़की शादी करके आती है तो क्या तब भी उसके सपोर्ट में कोई नहीं आता क्योंकि लड़का उनका अपना होता है बहू की छोटी सी गलती पर भी उसके मायके में फोन कर शिकायत कर देने की धमकी क्या सही है जब आप अपने लड़के की गलती नहीं सुन सकते तो क्या लड़की के मां-बाप सुन सकेंगे पर शायद वह इसे अपना हक समझते हैं कि हमने शादी करके उपकार किया और हमें माल भी खराब मिला. यह सब शायद हर जगह होता है हर घर में होता है पर किसी बहुत अपने करीब के ने बताया कि शरीर ही अपने साथ जाता है कोई अपना मां , भाई ,बहन, पति बच्चा कुछ नहीं है अपने आप को स्वस्थ रखो शांत रहो ! उतना ही करो जितना करने का सामर्थ हो ,उससे ज्यादा देने की चाह में खुद के टेंशन अपने दिमाग को परेशान ना करो यही मैंने सोच लिया है कि खुद को स्वस्थ रखना है शांत रखना है जितना कर सकती हूं उतना कर सकती हूं आगे मुझसे एक्सपेक्ट नहीं करो ना मैं कर सकती हूं . तो अंत में इतना ही की शादी एक एडजेस्टमेंट है कोई अधिक कर सकता है कोई कम ! और मेरी जितनी जितनी सीमा थी अर्जेस्ट करने की मैं कर चुकी हूं या बट आई हेट दिस एडजस्टमेंट.
Wrote by Bharti.

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