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आईना
Monika Jayesh Shah
Monika Jayesh Shah
23rd Nov, 2022

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आईना
आईना
आईना मेरी जिंदगी का;
आईना
आईना
कब तक देखू में;
जब तक आस है..
हमारे दिलों में
तब तक देखू क्या?
यू तो हम कहते नहीं कुछ..
ख़ामोश बन खुद को ही निहारते हैं;
क्या है. अपने जीवन में खुद को ही सवारते हैं!
ये आईना अपनी ज़िंदगी कभी बना देता हे!
कभी अपनी ज़िंदगी बिगाड़ देता है!
आईना कभी रोते हुए चेहरे को मुस्करा देता है..
कभी खुद ही अपने चेहरे को देख रुला देता है!
आईना अपने जीवन का एक आईना हैं..
सुख दुख और गम के साथ आईना
हमारा जीवन बना और बिगड़ा देता है!
हैं तो आईना कांच का पत्थर लगे तो टूट जाता हैं!
वैसे ही अपनो का दर्द लगे तो चेहरा मुरझा जाता हैं;
प्यार मिले तो दिल का रिश्ता सारवार हो जाता हैं!
ये आईना बडे ही गज़ब की चीज़ हैं..
अच्छे अच्छों का चरित्र एक पल में दिखा जाता हैं!
खुद को देख हम खुद ही सवरेगे!
अपने जीवन का आईना हम खुद ही बनेंगे!
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
मोनिका जयेश शाह

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