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ख़ुद का इंतजार
psycho writer
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22nd Nov, 2022

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दूर किसी गाँव में,
मुझे अभी भी ख़ुद का इंतज़ार है,
मैं कभी ना कभी वहाँ जाऊँगा,
कब कैसे कहाँ नहीं पता
पर अपनी ही खोज में पहुँच जाऊँगा
वहाँ पहाड़ मुझे
मुस्कुरा कर
अपनी गोद में छिपा लेंगे,
कुछ दोस्त जो मेरे
नए बनेंगे
उनके संग फिर ज़िन्दगी निभा लेंगे
कि एक नदी होगी वहाँ
तेज़ रफ़्तार में बहती हुई,
हर आने जाने वाले से कहती हुई
हिमालय की अनसुनी कहानियाँ
और वहीं बैठ,
मैं सारी कहानियाँ पड़ जाऊँगा,
सौ मुश्किलें जो लेकर चलता हूँ
उन सभी को तर जाऊँगा
दूर उसी गाँव में,
जहाँ मुझे
अभी भी ख़ुद का इंतज़ार है...
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