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BHARAT KOTKAR
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21st Nov, 2022

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तेरी यादों में आंखों से आसू बहते हैं ।
फिर वही चल ...वही चल कहते हैं....
दिल भी बेजान है जुबान खामोश हैं ।
तेरी जुदाई का गम हरपल ये सहते हैं....
फिर वही चल ...वही चल कहते हैं....।।
पूछा हमने भी उनसे चले तो कहां चले
अलग अलग है रास्ते हमारे अलग अलग है मंजिले ।
जाए नजर जहां तुम्हे ढूंढते रहते है....
फिर वही चल ...वही चल कहते हैं....।।
मेरा भी हाल है इनके ही जैसा
तुम ही बताओ तुम्हारा हाल है कैसा।
क्या मेरी भी यादें तुम्हे अब भी रुलाती हैं
सोच में मेरी तुम्हारी आंखें अब भी भर आती हैं।
खयालों में तुम्हारे दिन रात आहें भरते हैं.…
फिर वही चल ...वही चल कहते हैं....।।
शब्द - बी. के.

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