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कैसा ये हाल है
Prince kumar Jha
Prince kumar Jha
20th Nov, 2022

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अंतरमन में
चल रहा घोर द्वंद है!
पर बाहर से दिखना
बहुत शांत और सरल है!
कैसी ये मजबूरी
कैसा ये हाल है!
वक्त की तकाजा है ये
वक्त का हीं मार है!
एक तरफ बढ़ती जिम्मेदारी का बोझ
तो दूसरी ओर वक्त हीं वक्त के खिलाफ है!
हज़ारों उलझनें
और लाखों परेशानियों के बीच रहना उलझे
फिर भी कोई पूछे तो कहना
मैं ठीक हूँ बड़ा कमाल है!
रोते हुए भी मुस्कुराना
हज़ारों गम हंसकर छुपाना!
ना चाहते हुए भी
सब ठीक है जैसे बताना!
भीतर से कोमल
पर बाहर से है कठोर दिखाना!
गुस्सा बेबसी और लाचारी
दुख दर्द और गम सबको है भुलाना!
गलत पर भी गलत
और सही पर भी गलत ठहरता है जमाना!
फिर भी
जमाने में ही है मिलकर उसे रहना!
अधिकारों से ज्यादा
अपना कर्तव्य आता है जिसे निभाना!
कहने को तो वह पुरुष प्रधान है
पर नारी के लिए समर्पित उसका जीवन बलिदान है!
कैसा ये हाल है

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