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मानवता का हनन.....

वर्षा प्रधान
16th Jun, 2020

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द्रवित हृदय से भरी लेखनी से एक लेख.....सभी युवाओं के लिए......….

""""बेवजह किसी को इतना परेशान न करो कि उसके जान के दुश्मन ही बन जाओ"""

जीवन मे अगर आप किसी की मदद नही कर सकते तो, किसी के पीछे इतना भी न पड़ जाओ कि आप उसके मौत का कारण बन जायें,आपको कानून सजा दे ना दे,पर आपकी आत्मा आपको इतना रुला देगी कि, रातों की नींद गायब हो जाएगी। फ़िल्म इंडस्ट्री ही क्यो..... शिक्षा ,खेल जगत छोटे-बड़े स्तर के क्लब, छोटी-बड़ी संस्था.....ऐसे तमाम जगहों पर इतनी गंदी राजनीति लोग करते हैं। इस तरह की राजनीति आज समाज का एक हिस्सा बनती जा रही हैं,आपके इस बुरे बर्ताव से हर रोज़ न जाने कितने बेकसूरों की जान चली जाती है। आज सुशांत सिंह राजपूत को एक अभिनेता के रूप में हम सभी जानते हैं....तो पता भी लग जायेगा कि इसके पीछे वजह क्या थी और कौन था, परंतु छोटे स्तरों पर अक्सर किसी ना किसी की गंदी राजनीति की वजह से न जाने कितने बेकसूरों की जान चली जाती है। लोगो को तनाव मिल जाते हैं। ऐसे गलत कदम उठाने के लिए उनको मजबूर कर दिया जाता है, यह समस्या एक परिवार से लेकर विश्व स्तर तक होती है।यह किसी महामारी की ही तरह ही है,मेरा मानना है कि अगर आप किसी की मदद करने में सक्षम नही है तो,किसी को इतना भी नीचे ना गिरायें कि, आप उसके जान के दुश्मन बन जायें, और कोई व्यक्ति आपकी वजह से इस संसार को छोड़ दे फिर बाद में आपके पास सिर्फ पछतावा ही रहे। याद रहे प्रकृति बदला जरूर लेती है..... क्योकि इतिहास की पुनरावृत्ति निश्चित है, हो सकता है आपको उसकी सजा वह व्यक्ति न दे, समाज न दे,परंतु आपको किसी न किसी रूप में उसकी सजा मिलती जरूर है.....एक बात जरूर कहना चाहूंगी, जो भी लोग तनाव में आकर अपने कैरियर को,खुद की जान से भी ज्यादा महत्व देकर ऐसा कदम उठाते हैं, उनको याद रखना चाहिए कि किसी के द्वारा किया गया अपमान आपके जान से बढ़कर नही हो सकता। आपके कैरियर से पहले,आपके माता-पिता आपके अपने वो लोग,जो आपको अपने आप से भी ज्यादा प्यार करते हैं,आप उनके लिए कीमती हैं,कैरियर का क्या है.....एक रास्ता बंद होगा,दूसरा खुलेगा..... पर जब आप खोलना चाहोगे तब, अगर खुद ही उस दरवाजे को हमेशा के लिए बंद किया तो क्या होगा.....कुछ दिन लोग याद करेंगे फिर भूल जायेगे,परन्तु आप अगर डटे रहे तो वही लोग आपको रास्ता देंगे,जो आपको रोकने की कोशिश कर रहे थे।
""चट्टानों की एक छोटी सी सुराख से भी पानी अपना रास्ता स्वयं बना लेता है,और वही कठोर चट्टान पानी को रास्ता देता है जो उसकी राह रोके खड़ा था।""
आत्महत्या वही व्यक्ति करता है, जो हीन भावना से ग्रसित होता है। इसलिए किसी भी व्यक्ति की काबिलियत पर,उसको प्रोत्साहन दें, और उसको आगे बढ़ाने का प्रयास भी करें।कभी-कभी बहुत समझदार व्यक्ति भी हीन भावना से ग्रसित होकर यह कदम उठा लेता है,उसके अंदर का विवेक मर जाता है,क्योकि जब इंसान तनाव में होता है तो वह सिर्फ दिमाग की सुनता है,हृदय की नही। इसलिए मैंने एक लेख लिखा था कि ध्यान योग के माध्यम से हम अपने आप को तनाव मुक्त रख सकते हैं।
मैं अपने लेख के माध्यम से सिर्फ यही बोलना चाहूंगी कि आपकी जान,आपके कैरियर से ज्यादा कीमती है। इस दुनिया मे आप जब तक लोगो के सामने डट कर रहेंगे,लोग आपको पूछेंगे,आपको नीचा भी गिराएंगे,तो क्या हुआ..... गिराने दो.....क्योकि जब जिस वक्त कोई किसी के साथ छल करता है,उसको नीचे गिराता है,वह तुम्हारे साथ नही बल्कि स्वयं के साथ करता हैं ।
इसलिए खुद को चट्टान बना लो, लोगो का.....समाज का.....अपने विरोधियों का.....डट कर सामना करो.....आगे बढ़ो.....जीत उसकी होती है,जो चुनौती को स्वीकार करे ।
हारो मत....भागो मत.....डट कर सामना करो.....
एक बात और जरूर कहना चाहूंगी कि, अगर हम किसी की मदद न करे तो उसको नीचा भी न गिराए ......अपने व्यक्तित्व में प्रोत्साहित करने का गुण लाएं, ताकि हम स्वयं की आत्मा में आंनद की अनुभूति कर सके।

वर्षा प्रधान.........
16.6.2020

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वर्षा प्रधान

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