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मौत!
O.N. Tripathi
O.N. Tripathi
23rd Sep, 2022

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मौत!
देखने में,
जितना-
दुखदायी होता है,
उतना-
सुनने में नहीं।
यह-
जीवों या रिश्तों,
दोनों के लिए-
एक जैसा होता है।
हरदम-
सोचते तो रहे हम,
लेकिन -
महसूस नहीं किये,
अक्सर-
बेखबर रहे इससे।
क्यों?
घुट-घुट कर मरते रहे,
उन्हें-
बचाने के लिये,
जिन्हें-
मेरे मरने का,
कोई-
फर्क ही नहीं पड़ता।
-© ओंकार नाथ त्रिपाठी बशारतपुर गोरखपुर उप्र।
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