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चार रानियों वाला राजा
उत्सव
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23rd Sep, 2022

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एक बार एक रईस राजा था जिसकी चार रानियाँ थीं। वो अपनी चौथी रानी को सबसे ज्यादा प्यार करता था और उसे महंगे कपड़ों से लादे रहता और बेहतरीन खाना खिलाता था, उसे महूंगे कपड़ों से लादे रहता और बेहतरीन खाना खीलाता था। वो उसे केवल सबसे अच्छा देता था।वो अपनी तीसरी पत्नी से भी बहुत प्यार करता था और उसका आस – पास के राज्यों में बखान करता था. मगर उसे डर था कि वो एक दिन उसे किसी और के लिए छोड़ देगी।
वो अपनी दूसरी पत्नी से भी प्यार करता था, और वो उसकी हमराज़ थी और उसके साथ हमेशा सहानुभूति , इज्ज़त और धैर्य से रहती थी, जब भी राजा को कोई परेशानी होती वह उसे बताता ताकि वह राजा को उस परेशानी का हल बता सके.
राजा की पहली पत्नी राजा की सबसे वफ़ादार थी और राज्य और उसकी दौलत बढ़ाने में बहुत मदद करती थी। मगर, वह अपनी पहली पत्नी से प्यार नहीं करता था।
एक बार राजा बीमार पड़ गया और उसे समझ आ गया की उसके पास समय कम है, इसीलिए उसने अपनी चौथी पत्नी से पूछा की, मैंने सबसे ज्यादा प्यार तुमसे किया है. और तुम्हे सबसे बेहतरीन चीजो से नवाजा है, और तुम्हारा सबसे ज्यादा ध्यान रखा है.
अब जब में मरने जा रहा हु, क्या तुम मेरा साथ देने के लिए मेरे साथ चलोगी? तब उसके चौथी पत्नी ने जवाब दिया की बिलकुल नही.. उसकी बात राजा के दिल में छुरी जैसी चुभी…
अब दुखी राजाने अपने तीसरे पत्नी से पुछा की मैंने सारी जिंदगी तुमसे प्यार किया, अब में जा रहा हु, क्या तुम मेरे साथ चलोगी?
नहीं ऐसा तीसरी पत्नी ने जवाब दिया. जिन्दगी बहुत अच्छी है और जब तुम मरोगे तो में दुबारा शादी करुँगी.
अब राजा का
दिल बैठ गया था और वह ठंडा पड़ गया था, फिर उसने अपनी दूसरी पत्नी से पूछा, मैंने हमेशा ज़रूरत के वक़्त तुमसे मदद माँगी और तुमने भी हमेशा मेरा साथ दिया. जब मैं मरूँगा क्या तुम मेरा साथ देने मेरे साथ आओगी ?
माफ़ करना, इस बार मैं तुम्हारी मदद नहीं कर सकती ! दूसरी पत्नी ने जवाब दिया, ज्यादा से ज्यादा मैं तुम्हे तुम्हारी कब्र तक छोड़ सकती हूँ। ” उसका जवाब बिजली की तरह राजा को लगा और वो बेहद दुखी हो गया।
तभी एक आवाज़ आई : मैं आपके साथ चलूंगी और जहाँ आप जायेंगे, वहाँ चलूंगी. राजा ने नज़र घुमाई तो उसकी पहली पत्नी खड़ी थी. वो बेहद कमज़ोर थी क्योंकि वो खाती नहीं थी.
दुःख से भरकर राजा ने कहा की जब मेरे पास मौका था तब मुझे तुम्हारा बेहतर ध्यान रखना चाहिए था. दोस्तों इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है की…
हमारी चौथी पत्नी हमारा शरीर है। हम चाहे इसे सजाने – धजाने में कितना भी दिल लगायें , मृत्यु के समय ये हमे छोड़ जायेगा.
हमारी तीसरी पत्नी हमारी संपत्ति दर्जा और दौलत है, जब हम मरते हैं, ये औरों को मिल जाती है.
हमारी दसूरी पत्नी हमारा परिवार और समिगण हैं, चाहे वो कितना ही हमारे साथ हों, ज़्यादा से ज़्यादा वो हमारे साथ शमशान तक आ जायेंगे, पर उससे आगे नहीूं.
हमारी पहली पत्नी हमारी आत्मा है, जो अक्सर दौलत, ताकत और अहूंकार के सलए बेध्यान हो जाती है.
मगर हमारी आत्मा ही एक ऐसी है जो जहा हम जायेंगे वहा तक जाएगी. इसीलिए इसे उपजाए, ताकतवर बनाए और इसका आज से ही ध्यान रखें! यही दुनिया में आपका सबसे बड़ा तौफा है.

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