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चांदसा अफसाना
मृण्मयी" मनवा"
मृण्मयी" मनवा"
22nd Sep, 2022

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चांद दिखाके नजरे झुकाये
खडा था राह पे कोई।।
चांदणी जैसी मुस्कान
पर मर मिटा कोई।।
चांदसा झुक गया वो,
दिल लगाकर कोई।।
झुकी निगहों सें बातोमे उलझा कर
दिल में समाया कोई।।
दिल का फसाना बया कर रहा है
बंद होठों से कोई।।
                     ।।©मनवा ।।

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