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अमीर बनानेवाली पुस्तके
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Atul Kawale
21st Sep, 2022

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अमीर बनानेवाली पुस्तकें
भारत में जब से मुक्त अर्थव्यवस्था का दौर शुरू हुआ है अमीर बनानेवाली किताबों का मार्केट भी जमकर बढ़ा है । "थिंक एंड ग्रो रिच", "रिच डैड पुअर डैड", "बड़ी सोच का बड़ा जादू" जैसी पुस्तकों की भारत में जमकर बिक्री हुई हैं । इन पुस्तकों में अमीर कैसे बना जाए, जीवन में आर्थिक सफलता कैसे प्राप्त की जाए इसका संपूर्ण मार्गदर्शन किया जाता है । इसके लिए लेखक अपनी स्वयं की या किसी सफल उद्यमी की सफलता का आधार लेता हैं। ये पुस्तकें बड़ी ही रोचक और पाठकों का उत्साह बढ़ानेवाली होती हैं। इन पुस्तकों को पढ़कर पाठकों को लगता है... अरे ! ये तो इतना आसान है । हम बेकार ही आर्थिक सफलता कैसे प्राप्त की जाए इसके लिए डरें बैठे थे"। इन पुस्तकों को पढकर पाठक एक स्वप्निली दुनिया में पहुँच जाता है जिसमें वो एक सफल और अमीर आदमी बना होता है । पाठक चाहें किसी भी उम्र का हो, इन पुस्तकों को पढ़ने के बाद उसे अपने सफल और अमीर होने के बारें में कोई भी शंका नहीं होती । लेकिन जब वो वास्तविकता के धरातल पर सफल और अमीर होने के लिए प्रयत्न करता हैं तब उसे पता चलता है की पुस्तकों की स्वप्नीली दुनिया और वास्तविकता में क्या और कितना अंतर होता हैं । लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी होती है । पहला प्रयत्न असफल होते ही पाठक का विश्वास इन पुस्तकों से और स्वयं अपने ऊपर से भी उड़ चुका होता है । ये अवस्था बड़ी ही त्रासदायक होती है । जेब भी खाली हो चुकी होती है और आत्मविश्वास भी ढल चुका होता है । इसलिए इन अमीर बनानेवाली या अमीर बनने का स्वप्न दिखानेवाली पुस्तकों से जरा बचकर ही रहना चाहिए । खासकर युवाओं को इसके प्रभाव से स्वयं को संतुलित रखना चाहिए । अन्यथा इन पुस्तकों के प्रभाव में बहकर युवा अपने माता पिता का वर्षों से कमाया हुआ धन और अपना स्वयं का आत्मविश्वास दोनों को खो सकते है ।
इन पुस्तकों में जो बातें लिखी होती है वह वास्तव में पुस्तक के लेखक के साथ या पुस्तक में दिए गए नायकों के साथ घटित हुई होती है या नहीं ये जानने का कोई संसाधन पाठक के पास नहीं होता । ये पुस्तकें किसी आम बंबइया फिल्मों के नायक की तरह के नायक प्रस्तुत करती है जो रातोंरात लखपति करोड़पति बन जाता है । इन पुस्तकों में कई ऐसे टिप्स दिए गए होते है जो वास्तविक जीवन में कोई कर नही सकता या करना इतना संभव भी नही होता । इन टिप्स को जीवन में न उतारने को ये पुस्तकें आत्मविश्वास की कमी बताती है । ये पुस्तकें बताती है की प्रामाणिकता से भी अमीर बना जा सकता है । जबकि हम वास्तव में देखते है की अधिकतम अमीर आदमी भ्रष्ट मार्ग से ही अमीर बने होते है । हमारे आसपास ही ऐसे बहुतेरे अमीर आदमियों के उदाहरण मिल जाएंगे । प्रामाणिकता से अमीर बनना इतना आसान नहीं होता जितना ये पुस्तकें हमे बताती हैं । दूसरी बात ये की ये पुस्तकें विदेशी लेखकों की उनके अपने देश की पृष्ठभूमि को लेकर लिखी हुई होती है । भारत के और विदेशों के जनजीवन, व्यवहार, राजकीय और सामाजिक परिस्थिति में बहुत अंतर होता है । पुस्तक की हर बातें भारत के परिप्रेक्ष्य में तत्वतः और आम व्यवहार की दृष्टि से भी पूरी तरह से गैरलागु होती है । लेकिन पाठक की समझ में ये बात आती नही । वह वैश्विक परिस्थिति और अपने देश की परिस्थिति में अंतर नही कर पाता और पुस्तक के प्रभाव में बहता जाता है । इसी कारण से पुस्तक लिखने और बेचनेवाले तो अमीर हो जाते है लेकिन पुस्तक खरीदकर पढ़ने वाले और उसपर अमल करनेवाले अपना रहसहा भी गंवा देते है । तो आखिर इससे बचा कैसे जाए इसपर भी एक दृष्टि डालना जरूरी हो जाता है ।
सबसे पहले तो इन पुस्तकों को बहुत मनोयोग से पढ़ना ही नही चाहिए की जिससे हम इनके प्रभाव में आ जाए । हमे स्वप्निली दुनिया से बाहर रहकर ही इन पुस्तकों का आनंद लेना चाहिए । इन पुस्तकों में जो टिप्स दी गई होती है उनकी पृष्ठभूमि में उस पुस्तक के लेखक के देश के जनजीवन, आम व्यवहार और राजकीय अथवा सामाजिक परिस्थितियां होती है । उन परिस्थितियों से हमारे देश की परिस्थितियां मेल खाती है या नहीं इसके बारे में भी सजग होकर सोचना चाहिए । उस देश के कार्पोरेट सेक्टर और हमारे देश के कार्पोरेट सेक्टर में भी बहुत ज्यादा अंतर होता है । उन देशों में भ्रष्टाचार की स्थिति और हमारे देश में भ्रष्टाचार की स्थिति में और उसके अनुपात में भी भारी अंतर होता है । अमीर बनने की राह में भ्रष्टाचार एक बहुत ही बड़ा कारक होता है । इन पुस्तकों के नायक का जो चित्रण होता है उसमें उनके द्वारा किए गए भ्रष्टाचार का कोई चित्रण नही होता है । पाठक को यह बात पूरी संजीदगी से ध्यान में रखनी चाहिए । इन पुस्तकों में कई सारे नक्शे दिए हुए होते है जो या तो समझ से बाहर होते है या जिनका वास्तविकता से कोई लेना देना नही होता । क्योंकि इन नक्शों के अनुसार कोई भी व्यक्ति अपना जीवनयापन या व्यवहार नही करता और न कर पाता है ।
अंत में एक बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए की पुस्तकें पढ़कर कोई भी अमीर नही हो सकता । इन पुस्तकों में जिन नायकों के अमीरी का विवरण दिया होता है वे स्वयं भी कोई अमीर बनानेवाली पुस्तक पढ़कर अमीर बने हुए नही होते । उन्होंने किसी जमाने में एक ठोस शुरुआत की होती है । ढेर सारे उतारचढ़ाव देखे होते है । असफलताओं के दौर देखे होते है । भ्रष्टाचार भी किया होता है । तब कही जाकर वे अमीर बने होते है जिसमें भी काफी साल लगे होते है । इसलिए इन पुस्तकों को पढ़नेवाले पाठक अपनी बुद्धिमत्ता, देशकाल परिस्थिति, अपनी आर्थिक परिस्थिति और अपने स्वास्थ्य का संपूर्ण विचार करने के बाद ही कोई कदम उठाए तो बेहतर होगा । अन्यथा पाठक केवल इन पुस्तकों के लिखने और बेचनेवाले को ही अमीर बनाते रहेंगे और स्वयं अपना सबकुछ लुटाकर प्रारब्ध को दोष देकर जीवन का वास्तविक आनंद खोते रहेंगे ।
अतुल कावले
दिनांक : १४.०८.२०२२
मो. क्र.९४२३१०२३८९

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