Bluepad | Bluepad
Bluepad
एक दिन जब
O.N. Tripathi
O.N. Tripathi
21st Sep, 2022

Share

एक दिन,
जब-
पड़ जायेंगी,
चेहरे पर-
उम्र की झुर्रियां,
ढ़ल जायेगा,
मदमस्त!
तेरे यौवन का,
शबाब।
उपमा जड़ित,
तेरे-
केश, भौंहें,
होंठ,कपोल,
कटि,वक्ष,
नितम्ब और ललाट,
बन जायेंगें-
उपहास के आधार।
श्वेत केश,
ढ़ीली ढ़ाली देहयष्टि,
चुगली करेंगी-
तेरे इतराते कल की,
नहीं मिलेंगे-
गुणगान करने वाले।
तब-
मन के, कहीं,
कोने में-
दुबकी ,ठीठकी यादें,
मेरी-
रह रह कर,झांक उठेगी,
छा जायेंगी-
मानस पट पर।
तब शायद!
तुम,तड़प उठोगी,
बीते पल को-
सोच सोच कर,
जो गुजरे थे-
कभी, साथ हमारे।
© ओंकार नाथ त्रिपाठी बशारतपुर गोरखपुर उप्र।
एक दिन जब

234 

Share


O.N. Tripathi
Written by
O.N. Tripathi

Comments

SignIn to post a comment

Recommended blogs for you

Bluepad