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कृष्णा प्रेम भक्ति
Monika Jayesh Shah
Monika Jayesh Shah
19th Sep, 2022

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सुबह-सुबह ले पॖभु का नाम!
सर्वगुण संपन्न हैं..तेरा नाम!
बिगडे सब बनेगें तेरे काम!
फिर काहे का डर हैं..तुझे!
अपनी ही दुनिया में;
ऐशो आरामकर!
ये सोचकर ना डर
तू अकेला हैं!
आगे बढ़-आगे बढ़;
पीछे हैं..सारा जग तेरा!
नहीं हैं..तू आज से अकेला!
सुबह-सुबह ले पॖभु का नाम!
सर्वगुण संपन्न हैं.. तेरा नाम!
कल की फीकर में जीकर
अपनी आज खराब न‌ कर;
कल को‌ किसने देखा हैं!
आज का जीवन आज में हैं;
अपनी आज अपने आप
अपनों के संग में जीले!
सुबह-सुबह ले पॖभु का नाम!
सर्वगुण संपन्न हैं..तेरा नाम!
अपने‌ आप से औरो से
नफरत औ‌र‌‍ घृणा न कर!
एक-दूसरे के दिल में ...
बसते हैं..सब भगवान!
मोहमाया त्यागकर
एक-दूसरे से प्यार कर!
सुबह-सुबह ले पॖभु का नाम!
सर्वगुण संपन्न हैं..तेरा नाम!
अपने‌‌ आप को दोष देना
पहले बंद कर!
अपनी कतऀव्य निष्ठा से
तूने किये हैं..सब अच्छे काम!
खुद का खुद पर भरोसा कर!
मन में एक विश्वास रख!
सफलता‌‌‌ आज नहीं तो
कल मिल‌ ही जायेगी!
सुबह-सुबह ले पॖभु का नाम!
सर्वगुण संपन्न हैं..तेरा नाम
कहने की बात‌ सिर्फ में कहती नहीं!
दिल में उसे में भी अमल करती!
आप‌ सभी से बेइंतहा प्यार हैं!
तभी तो मेरी छोटी सी कविता बनती
मेरी कविता मेरे जीवन का सारवार‌ हैं!
सुबह-सुबह ले पॖभु का नाम!
सर्वगुण संपन्न हैं..तेरा नाम!
मोनिका जयेश‌ शाह
कृष्णा प्रेम भक्ति
कृष्णा प्रेम भक्ति

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