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मन की बात मुस्कुराहट के साथ
मृण्मयी" मनवा"
मृण्मयी" मनवा"
19th Sep, 2022

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समज सका ना कोई
क्यू मुस्कराहट फिकी पड गई
अहिस्ता अहिस्ता ।।
जिसने तुमको मुस्कुराना
सिखाया वो नादान था,
या तुम थे नासमज
दिल धड़का या यूही
चुप रहे जमाने के डरसे।।
रास्ता कितना भी हो लंबा
दुःख होते हैं संग अपने ।।
सुख पास होके भी मीलतां नहीं
सातवे आसमन पे जाने के बाद।।
अपने हो ना सके अपने
दुःख ने पराया ना समजा हमे।।
दिल में गम भरके
आंसूओंको रोका फिर भी
बह गये झरने कि तरह।।
हर वक्त कदम रखे जलते 
अंगरोंपर  फिर भी रहे गये
कुछ अपने जलाने के लिये।।
तस्विर आंखोंसे हटा न सका कोई
उनकी यादमे जला दिल हमारा
धूव्वा उठा  प्यार के नाम का।।
जिनका मन हो प्यारा
उनको अपनालो
हुस्न चीज है क्या जो
अंतरआत्मासे मुकाबला करे।।
जवानी है दो दिन कि
मन रहेगा हमेशा जवान।!
जीवनसाथी और हुस्न हो जायेंगे बुढे
पर मन हमेशा रहेगा जवान।।
💐💐💐💐 ©मनवा💐💐💐💐

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