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खुद अपने साथी बने!

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Ankita Desai
16th Jun, 2020

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"छीछोरे" फिल्म की कहानी में डिप्रेशन के चलते खुदखुशी का प्रयास करनेवाले अपने बेटे को सुशांत बताते हैं की वो और उनके दोस्त भी उनके कॉलेज के दिनों में किस तरहा से “छिछोरापन” किया करते थे और ‘लूजर’ के नाम से जाने जाते थे। लेकिन जब एक बार वो सभी जीतने की थान लेते हैं तब वो बाजी पलटकर रख देते हैं और विजयी होते हैं। इस फिल्म ने वाकई मेरे दिल को बहुत तसल्ली दी थी। लेकिन यह सबसे बड़ा संदेश देने वाले सुशांत को जिंदगी के सामने घुटने टेकते देखा तब लगा की हमे सुकून और खुशी भरे दो पल देनेवाले इन कलाकारों की जिंदगी क्या ऐसी ही होती है? हम फिल्म और जिंदगी में फर्क नहीं करते। फिल्म में जो दिखाया जाता है उसी Larger Than Life चित्र को सच समझ लेते हैं। लेकिन फिल्म जिंदगी नहीं होती इसका एहसास वो किरदार बखूबी निभाने वाले कलाकारों को होता है। सुशांत के स्क्रीन स्टोरी तो हम सब जानते हैं। लेकिन शायद उनके जीवन की पटकथा में कोई मुश्किलें आई हो। उन मुश्किलों के साथ इसी दुनिया में जीने के बजाय उन्होने दुनिया छोड़ देने का फैसला लिया हो। उनके दिल में चुभ रहे किसी दर्द की, जलाते हुए पछतावे की, भविष्य के परिणामों की फीकीर की जड़े उन्हे कितनी तकलीफ़े दे रही होगी इसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। एक बढ़िया करियर जिनके सामने हाथ जोड़े खड़ा था ऐसे एक राजपूत ने ऐसा पराजयी कदम उठाया, ख़ुदकुशी कर ली और अपनी सारी मुश्किलों से निजात पाई।

लेकिन मौत हर मुश्किलों का हल नहीं होता, इसे मुश्किलों से भागना कहते हैं। सुशांत ने यह रास्ता क्यों इख्तियार किया यह सवाल सुशांत की रहस्यमयी मौत को भुनाने के लिए नहीं बल्कि आज संपर्क के इतने जरिये होने के बावजूद बाकी रही हमारी कमियों को गंभीरता से उजागर करने के लिए उठाया जा रहा है।

सुशांत ने महज ३४ साल की कम उम्र में कोई भी गॉडफादर ना होते हुए बॉलीवूड में अपने कदम जमाएँ और खूब सफलता बटोरी। छोटे पर्दे की ‘पवित्र रिश्ता’ इस धारावाहिक से घर घर में पोहोंचे सुशांत ने बहुत कम समय में काय पो छे, शुद्ध देसी रोमॅन्स, डिटेक्टीव ब्योमकेश बक्षी, एम एस धोनी, केदारनाथ, छिछोरे जैसी सुपरहीट फिल्मों में मुख्य भूमिकाएँ निभाई। उनके काम की बहुत तारीफ हुई। कुछ फिल्मों के लिए उन्हे अवार्ड्स मिले तो कुछ के लिए नॉमिनेशन्स मिले। उसी दौरान उन्होने डांस रिऐलिटि शोज भी किए। सुशांत ने हर उस चीज में अपना जलवा दिखाया और अपना नाम रोशन किया जो दर्शकों को बहुत भाति है। उनके कुछ लव अफेयर्स भी काफी चर्चा में रहें। इसका मतलब छोटे पर्दे का यह सितारा सुशांत पूरी तरहा से लाईमलाइट में आ चुका था। कुछ ही दिनों में उनकी नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ ‘चंदामामा दूर के’ यह सायन्स फिक्शन फिल्म रिलीज होने वाली थी। इतना सब ठीकठाक चल रहा था तभी उन्होने अपनी जिंदगी को आखिरी क्लैप दिया। इससे यह तो जाहीर है की जो तकलीफ उन्हे हो रही थी वो बर्दाश्त के बाहर हो गई होगी, अपनी उबलती हुई भावनाओं पर काबू पाना उनके जैसे इंजीनियरिंग ग्राज्युएट के लिए शायद भारी पड़ गया था। जिसका अंजाम बहुत ही दर्दनाक हो गया। ऐसा किसी दूसरे के साथ ना हो इसलिए मुझे कुछ कहना है। अगर यह बातें ध्यान से पढे तो शायद डिप्रेशन से जूझ रहे किसी को इससे मदद मिल जाए।

आज हर कोई मेसेज कर और सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर कह रहा है की आप बातें करो, भावनाओं को व्यक्त करो, जो भी दुख, दर्द है उससे अंदर ही अंदर घुटते मत रहो, किसी के साथ शेअर करो, मेरे साथ शेअर करो। जो यह बात कह रहे हैं, उनका तह दिल से शुक्रिया। लेकिन सच बताइये, अगर वाकई में किसी को अपने दिल की भड़ास आप के सामने निकलनी हो, कुछ बताना हो, शेअर करना हो, किसी के साथ होने की, कोई सुनने वाला होने की जरूरत हो तब क्या हम उसके साथ उस वक़्त हो सकते हैं? ९० प्रतिशत वक़्त में नहीं। इसका कारण है हमारे अपने जीवन की आपाधापी में व्यस्त रहना। लेकिन अगर आप किसी वजह से दु:खी हो तो किसी से कहने के बजाय आप खुद अपने आप इससे बाहर निकल सकते हो। कोई साथ ना भी हो तो कुछ चिजे हैं जो आपके साथ हमेशा होती हैं। वो है...

१) आप खुद – अगर आप किसी परेशानी से जूझ रहे है और उसे अपने गले लगाकर रोते बिलगते रहे तो वो परेशानी आपसे दूर कैसे जाएगी? सबसे पहले उस परेशानी को अपने से दूर करो। तभी आप उसे किसी त्रयस्थ की तरह देख पाएंगे। आप समझ जाओगे की वो परेशानी, चिंता या मुश्किल आपके जिंदगी से बढ़कर नहीं है। अब आप उसे अपने से दूर कैसे करेंगे? आसान है।

२) Distraction – मन को किसी काम में लगा दीजिए। हमारा शरीर अपने आप में एक अस्पताल है और हमारा मन एक प्रयोगशाला। यहाँ कई तरह के हॉर्मोन्स अपना काम करते रहते है। अगर आप खुश होते हैं तो गूड हॉर्मोन्स और दुखी होते हैं तो बॅड हॉर्मोन्स खून में स्त्रवित होते हैं। अगर बॅड हॉर्मोन्स खून में चले जाएँ तो इसका विपरीत परिणाम आपके शरीर पर होता है। और हमेशा दुखी रहने से यह परिणाम बढ़ता जाता है और शरीर में तरह तरह की बीमारियाँ होने लगती हैं। इसलिए आप चाहे जीतने भी दुखी हो, जितना हो सके, जबरदस्ती से ही सही, पर अपने आपको खुश रखने की कोशिश करो। इसके लिए यूट्यूब पर कॉमेडी प्रोग्राम देखिए। सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और एक दूसरे पर कीचड़ उछालने वालों के पोस्ट ना पढ़ें। हसते खिलखिलाते लोग और बच्चों के नाटक, फिल्म या स्किट्स देखिए, जैसे की कॉमेडी सर्कस, कॉमेडी शोज, हास्य कविताएं, Kids Arguing with Dad,  Big Shot By Steve Horway और बच्चों के लिए बनाए गए वीडियो देखें। यह चिजे आपके दिल को सुकून और खुशी देगी।

इससे अगर आप ठीक महसूस करें तो ‘मेलुहा’ जैसा हल्का फुल्का उपन्यास पढ़ें। इस समय कोई भी वैचारिक, ऐतिहासिक या पढ़ाई की किताबें ना पढ़ें। लेकिन अगर आपको उनको पढ़कर ही सुकून मिलता हो तो आप वो पढ़ लीजिए। ‘मेलुहा’ में प्राचीन सभ्यता का बहुत मनोहारी रूप से वर्णन किया है। जब आप इसे पढ़ते हो तो वो चित्र आपके दिमाग में तैयार होने लगता है। जाहीर है की आपका मन किसी दूसरी चीज में लाग्ने लगता है। इसलिए मैं आपको ‘मेलुहा’ पढ़ने की सलाह दे रही हूँ।

३) समय के पाबंद बनो – यह न सिर्फ शरीर के लिए बल्कि मन के लिए भी जरूरी होता है। हमारा शरीर हमारे मन का नियंत्रण में होता है। आप जब सुबह जल्दी उठने की थान लेते हो तो यह आपके मन का निर्धार होता है। इस तरह समय का पाबंद होने से मन अनुशासन में रहता है। और अनुशासन में रहने वाला मन कोई भी काम सोच समझ कर करता है। इसके अपवाद है। लेकिन यहाँ हम आम तौर पर होने वाली चीजों के बारे में चर्चा कर रहे हैं।

४) दिल में जो भी हो वो लिख दो। ऊपर लिखे इलाज करने से पहले और करने के बाद भी लिखो। इसमें लिखो कि मुझसे क्या और कहाँ गलती हुई, कौन सही था, मेरी या किसी और की गलती क्या इतनी बड़ी थी जिसे माफ नहीं किया जा सकता? मुझे अब क्या करना चाहिए? परेशानी का और क्या हल हो सकता है? यह सब लिखिए।

५) लिखते वक़्त एक अहम मुद्दे पर भी लिखे। आपके किसी दोस्त, आपके भाई बहन, सगे संबंधी, पहचान वालों में किसी को भी इस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता तो आप उसे क्या सलाह देते। वो लिख लीजिए। उसके बाद वो ही सलाह अपने आप को दें। खुद अपने दोस्त बने, गाइड बने। डिप्रेशन की दवाइयाँ लेने से यह कई गुना बेहतर इलाज है।

भगवान गौतम बुद्ध ने कहा था, 'अत्त दीप भव'। दुनिया में आपके लिए कोई खाली बैठा नहीं है। आपको कोई साथी मिल जाए तो बहुत बढ़िया। लेकिन अगर ना मिले तो खुद अपने साथी बने। फिर उसके बाद ऐसे किसी इंसान के साथी बनो जिसे आपकी जरूरत हो। आपके जैसे कई सारे लोग इस दुनिया में हैं। उनेक आँसू पोंछ दो। लेकिन यह आप तब ही कर सकते हो जब आप जिंदा रहोगे, है ना!

जिंदगी में कई सारी समस्याएँ और कठिनाइंयां आएंगी लेकिन इसकी वजह से जीवन को एक सजा मान कर मत जिओ, ना ही किसी की दया पर जिओ बल्कि इसे नए जीवन की दीक्षा बनाकर जिओ।

चलो, अब एक लंबी सांस लो और अपने मन की प्रयोगशाला के दरवाजे खोल दो... खूद जिओ और दूसरों को जीने के लिए प्रेरित करो....

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Ankita Desai

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