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साथ तू रेहता तो

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Mugdha Kadam
15th Jun, 2020

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साथ तू रेहता तो शायद बात कुछ अलग होती
जिंदगी तेरे साथ कुछ हसीन सी बीत जाती

मेरी सुबेह कि मुस्कान सांझ कि हया
तुझसे हि तो आती
तुझे कितना अब और चाहू
काश मी तुझे केह पाती
साथ तू रेहता तो...

चांद कि नूर में मेरी मन कि
चांदनी चेहेक ऊठ जाती
तुझे आँखो में पूरा समा लाती
साथ तू रेहता तो....

खैर बात तो फिर भी नही है बिगडी
सफर तो अब भी है जारी
बस इतना जानते है
मंजिल तो बस यही कहेगी
साथ तू रेहेता तो शायद बात कुछ अलग होती
तो शायद बात कुछ अलग होती
तो शायद बात कुछ अलग होती

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Mugdha Kadam

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