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उल्हासनगर शहर की स्थापना...
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DeepakC
6th Aug, 2022

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🕉️💐उल्हासनगर का इतिहास💐🕉️
उल्हासनगर शहर का स्थापना दिवस 8 अगस्त 2022...
उल्हासनगर का 73 साल का इतिहास आपके समक्ष प्रस्तुत है...
*उल्हासनगर* नाम रखने से पहले इस शहर का नाम *कल्याण कैम्प* था,
उल्हासनगर शहर की स्थापना *8अगस्त 1949* साल में हुई थी
उल्हासनगर की स्थापना का शिलालेख उमनपा कार्यालय के पिछे आज जहां स्विमिंग पुल है, केम्प नम्बर 3 में वहां तत्कालीन गवर्नर श्री सी राजगोपालाचारी जी के हाथो रखा गया था,
*विठ्ठल वाड़ी* स्टेशन नाम के पहले इस स्टेशन का नाम *जेम्स रेल्वे साइडिंग* के नाम से जाना जाता था,
1949 में बना उल्हासनगर का सबसे पहला *आश्रम स्वामी शांतिप्रकाश आश्रम* था,
उल्हासनगर में तब से आज तक हर केंप में ओटी सेक्शन बोला जाता है, ओटी शब्द का पुर्णअर्थ ऑफिसर्स टेनामेंट है,
उल्हासनगर में उस समय से बना *वीटीसी ग्राउंड* में वीटीसी शब्द का पुर्णअर्थ *वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर* है,
1947 में सिंध प्रांत से निर्वासित होके आये मराठी समाज की तभी से बनी संस्था का नाम सिंध महाराष्ट्रीय समाज है, जो आज भी मराठा सेक्शन में कार्यरत है,
1947 के स्वतंत्रता संग्रांम में हिस्सा लिये उल्हास नगर अम्बरनाथ बदलापुर के 40 स्वतंत्रता सेनानी और शहीदों के नाम का शिलालेख उल्हासनगर में आज भी गोलमैदान के मुख्य द्वार पर स्थापित है,
उल्हास नगर में 1947 के पूर्व से ही बना एक मिलीट्री तालाब हुआ करता था, वो इस समय भी उल्हासनगर कैम्प 3 स्थित रामायण नगर के सामने है, जिसे अभी बन्द कर दिया गया है, उल्हासनगर में ऐसे 5 मिलिट्री तालाब थे,
उल्हास नगर में 1947 से लेकर आज तक 75 सालों से अखण्ड एक पवित्र ज्योती प्रज्वलीत हो रही है वो स्थान पुज्य चालिया मंदिर है, जहां पीरघोट से 75 साल पहले लायी गयी ज्योत अखंड प्रज्वलित है,
सिंधी समाज द्वारा प्रती वर्ष मनाये जाने वाला पवित्र पर्व चालिया जो चालीस दिन तक मनाया जाता है,
सिंधी भाई बंटवारे के बाद जब भारत में आये
तब उल्हासनगर के सिंधी भाई पवित्र ज्योत के साथ कुल 5 धार्मिक य़ादगारे अपने साथ लाये थे, वो अभी पुज्य चालिया मंदिर मे रखी हुयी हैं,
1947 में सिंध प्रांत से आये निर्वासितो की संख्या 94000 थी, निर्वासितो के लिये 2126 बैरक और 1176 मकानों में प्रस्थापित किये गये थे,
उल्हासनगर शहर सबसे पहले केंप नम्बर 5 से बसना शुरू हुआ था,
उल्हासनगर की सबसे प्रसिद्ध फ़िल्म इंडस्ट्री में नाम कमाने वाली 2 अभिनेत्री बहनें साधना जी और बबिता कपुर जी हैं,
थाने ज़िला का सबसे बड़ा टाउन हॉल उल्हास नगर में है उसका नाम शहीद जनरल अरुणकुमार वैद्य सभागृह रखा गया है,
थाने जिला का सबसे बड़ा सेमी ओलिम्पिक स्विमिंग पुल भी उल्हासनगर में स्थित है, थाने जिला का क्षेत्रफल में सबसे बड़ा कॉलेज सीएचएम कॉलेज है,
थाने जिला की सबसे बड़ी लायब्रेरी भी उल्हासनगर के आरकेटी कॉलेज में है,
उल्हासनगर नगरपालिका में क्षेत्रफल बढ़ाने हेतु आसपास के म्हारलगांव, वरप, काम्बा, आशेला, मानेरे, आणे और भिसोळ ये 7 गांव शामिल करने का प्रस्ताव था,
उल्हासनगर महानगर पालिका का क्षेत्रफल मात्र 13.04 चौरस किलोमीटर है,
2011 की जनगणना नुसार उल्हासनगर की कुल आबादी 5,06,937 है,
उल्हासनगर में इंडियन नेव्ही बेस है जो कैम्प 3 के अशोक अनिल टॉकीज़ के सामने है,
सन 1939 से लेकर 1945 के बीच उल्हासनगर शहर जो पहले कल्याण कैम्प के नाम से जाना जाता था, एक मिल्ट्री कैम्प था, दुसरे विश्वयुद्ध के दौरान के सिपाही यहां रहते थे, 1945 में विश्वयुद्ध समापन के बाद यहां से ब्रिटिश आर्मी चली गयी और 2 साल से बन्द पड़े जंगल, गलेतक की घास, सांप, बिछुओं से भरी इस धरती पर निर्वासितों को ला फेंका गया,
इस शहर के लोगों ने मेहनत मशक्कत करके जंगल को रहने लायक नगर बनाया, 1947 में जो एक जंगल था उसमें आज 2019 में 70 सालों में 250 किलोमीटर की सीमेंट कंक्रीट की सड़कें और गलियां हैं, 60 प्राइवेट निजी अस्पताल हैं, 3 सरकारी अस्पताल हैं, 255 क्लिनिक हैं, 129 प्राइमरी, 56 सेकंडरी और 9 हायर सेकंडरी स्कुल हैं, साथ ही 19 कॉलेज हैं, दर्जनों गार्डेन हैं, कम समय में बिना किसी साधन और सरकारी सुविधाओं के अभाव में इतनी तरक्की करने वाला ये देश का एकमात्र शहर है, साथ ही देश का पहला ये शहर है जो अपना जन्मदिन मना सकता है, देश की पहली ट्रेन थाने और मुंबई के बीच 1853 में जब शुरू हुई थी, तब उस ट्रेन के इंजन के लिए पानी की व्यवस्था जिस वालधुनी नदी द्वारा की गई थी वो नदी उल्हासनगर से होकर ही गुज़रती है, वालधुनी तथा उल्हास ये 2 नदियाँ और विट्ठलवाडी, शहद और उल्हास ये 3 रेल्वे स्टेशन इस शहर के भाग्य में हैं,
ऐसे हमारे प्यारे उल्हासनगर शहर की स्थापना को 8 अगस्त 2022 के दिन 73 साल पुरे हो रहे हैं,
उल्हासनगर की संस्कॄति के बारे में, अपने शहर के बारे में जान सको इसलिए ये जानकारी आप सभी के समक्ष प्रस्तुत की गई है.

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