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तड़प
उत्सव
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6th Aug, 2022

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ना जाने कब से कैद कर रखा था मैंने उसे पिंजरे में,
मुझे लग रहा था कि वो खुश है उस पिंजरे में
क्योंकि कभी उसने कोई शिकायत की ना थी,
पर शायद कहीं ना कहीं उसके दिल में आजाद होने की तमन्ना थी
वह देखना चाहती थी इस दुनिया को,
वह उड़ना चाहती थी खुले आसमानों में
मैंने कैद तो किया था उसे पर कभी उसे किसी चीज की कमी ना होने दें,
उसकी हर ख्वाहिशों को पूरा किया था मैंने
उसके लिए मैं सब से लड़ गया था,
अगर उसे उड़ना ही था तो उसने मुझे पहले क्यों नहीं बोला?
मैंने तो उससे कई बार पूछा था,
पर कभी उसने किसी चीज की शिकायत ना की
जब भी पूछता था उसे वो कहती थी मैं बहुत खुश हूं तेरे साथ,
तुम जैसे रखोगे मैं वैसे ही रहूंगी
फिर क्यों आज वो मुझे छोड़ कर उड़ गई,
आखिर किस चीज की कमी उसे महसूस हुई
क्या जिस तरह मैं उसके लिए तड़प रहा हूं,
वो भी मेरे लिए तड़प रही होगी
क्या वो भी मेरी तरह ही मुझे याद करके रो रही होगी!!

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