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जिंदगी... शायरी भाग १....🙏🙏
 Dr Bhawna Nagaria
Dr Bhawna Nagaria
5th Aug, 2022

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अजबगजब है … जिंदगी का तमाशा ,
कभी…..हाथ आशा….. कभी निराशा ,
पसंद नापसंद का… इसे नहीं ख्याल ,
इकतरफा सुना देती …. ये अपना फरमान |
जिंदगी के इम्तहानों से ,
अब रिहाई चाहिए ,
खुदाया थक गई हूं मैं ,
अब मुझे विदाई चाहिए |
राएगॉं है जिंदगी ,
अपनों के बगैर ,
किसको दिखाएं…जख्म ,
इस दिल को खोलकर ,
यहां….. अपने ही बैठे हैं ,
नमक ...हाथों में लेकर |
अजब बिछी है ....जिंदगी की बिसात ,
चल रहा खेल… हर हाल में देना मात ,
करे किस पर ये दिल....एतबार ,
हर चेहरा छिपाए है…चेहरे हजार |
तमन्ना थी… जिंदगी के चलचित्र में.. सजे हर रंग ,
साथ अपनों के … .. हों पक्के और चटकीले ये रंग ,
पर तूलिका का रंग… . अभी सूख भी ना पाया ,
इस बेमौसम की बारिश ने….. इसे बेरंग कर डाला |
जिंदगी की गफलतें… ,
जाने कहां ले आई तू ,
हर तरफ नफरतों का हुजूम ,
उलफतें ना जाने… कहां हुई गुम |
( राएगाॅं.... व्यर्थ )
🙏🙏

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