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पिता....... 🙇‍♂️
vicky
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5th Aug, 2022

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*︵︷︵︷︵︷︵︷︵︷︵*
*(` क्षमा कीजिए, पिताश्री ´)*
*(¸ माँ से सुन्दर कोई नहीं ¸)*
*︶︸︶︸︶︸︶︸︶︸︶*
*एक बार गणेशजी ने अपने पिता*
*भगवान शिवजी से कहा ~ पिताजी !*
*आप यह चिताभस्म लगाकर,*
*मुण्डमाला धारणकर*
*अच्छे नहीं लगते.*
*मेरी माता गौरी ... अपूर्व सुंदरी*
*और आप उनके साथ*
*इस भयंकर रूप में.*
*पिताजी !*
*आप एक बार कृपा करके*
*अपने सुंदर रूप में*
*माता के सम्मुख आएं,*
*जिससे हम आपका*
*असली स्वरूप देख सकें.*
*भगवान शिवजी मुस्कुराये और*
*गणेशजी की बात मान ली.*
*कुछ समय बाद, जब शिवजी*
*स्नान करके लौटे, तो*
*उनके शरीर पर भस्म नहीं थी.*
*बिखरी जटाएं सँवरी हुई,*
*मुण्डमाला उतरी हुई थी.*
*सभी देवता, यक्ष, गंधर्व,* *शिवगण*
*उन्हें अपलक देखते रह गये,*
*वो ऐसा रूप था, कि*
*मोहिनी अवतार रूप भी*
*फीका पड़ जाये.*
*भगवान शिव ने अपना यह रूप*
*कभी प्रकट नहीं किया था.*
*गणेशजी अपने पिता की*
*इस मनमोहक छवि को देखकर*
*स्तब्ध रह गए, और मस्तक झुकाकर*
*बोले ~ मुझे क्षमा करें पिताजी !*
*परन्तु अब आप अपने पूर्व स्वरूप को*
*धारण कर लीजिए.*
*भगवान शिव मुस्कुराये और पूछा ~*
*क्यों पुत्र ..!! अभी तो तुमने ही मुझे*
*इस रूप में देखने की इच्छा*
*प्रकट की थी, अब पुनः*
*पूर्व स्वरूप में आने की बात क्यों ?*
*गणेशजी ने*
*मस्तक झुकाये हुए ही कहा* ~
*क्षमा करें पिताश्री !*
*मेरी माता से सुंदर कोई और दिखे,*
*मैं ऐसा कदापि नहीं चाहता.*
*शिवजी हँसे , और अपने*
*पुराने स्वरूप में लौट आये.*
*पौराणिक ऋषि इस प्रसंग का सार*
*स्पष्ट करते हुए कहते हैं* ~
*आज भी ऐसा ही होता है.*
*पिता रुद्र रूप में रहता है, क्योंकि*
*उसके ऊपर परिवार की जिम्मेदारियाँ*
*परिवार का रक्षण, उनके*
*मान सम्मान का ख्याल रखना होता है.*
*इसलिए ... वो थोड़ा कठोर रहता है.*
*और माँ ... सौम्य, प्यार, लाड़, स्नेह*
*उनसे बातचीत करके प्यार देकर*
*उस कठोरता का बैलेंस बनाती है.*
*इसीलिए*
*सुंदर होता है माँ का स्वरूप.*
*❗ पिता पर से भी ❗*
*जिम्मेदारियों का बोझ हट जाए,*
*तो वो भी बहुत सुंदर दिखता है.*
पिता....... 🙇‍♂️

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