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पर्यटकों की पहली पसंद बन चुकी है ‘ओयोे रूम्स’

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Vinisha Dhamankar
21st Apr, 2020

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आप कहीं बाहर जाने की सोचते है और उसके लिए आपको बहुत सी तैयारियां करनी पड़ती है। सबसे पहली तैयारी होती है ठहरने के लिए होटल बुकिंग की। इसके लिए पहले लोग बड़े-बड़े होटलों में बुक करवाते थे। लेकिन ये होटल सभी व्यक्ति के बजट में नहीं होते और उनपर अधिक बोझ पड़ता था। अब लोगों की पहली पसंद ‘ओयो रूम’ बन चुकी है। ऐप के जरिए होटल रूम्स बुकिंग की सुविधा देने वाली कंपनी है। ‘ओयो रूम’ ट्रैवलर्स को सस्ते दामों पर बेहतरीन सुविधाओं के साथ देश के बड़े शहरों में कमरे उपलब्ध कराती है। जापान के सॉफ्टबैंक ने ओयो कंपनी में 250मिलियन डॉलर का निवेश किया है।
‘ओयो’ स्टार्टअप कंपनी है। यह भारतीय स्टार्टअप की लिस्ट में तीसरी सूची पर आता है। ओयो ने भारत में होटल रूम बुंिकंग के बिजनेस का तरीका ही बदल कर रख दिया है। इस कंपनी के फाउंडर रितेश अग्रवाल हैं। रितेश का जन्म 6 नवम्बर 1993 को उड़ीसा राज्य के जिले कटक बीसाम के एक व्यवसायिक परिवार में हुआ है। बारहवीं तक कि पढ़ाई उन्होंने जिले के ही स्कैर्ड हर्ट स्कूल में की। जिन्होंने 17साल की उम्र में इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ इस कंपनी की शुरुआत की।
रितेश के लिए यह शुरूआत आसान नहीं थी। जानकारी के अनुसार ओयो की शुरूआत करने से पहले रितेश कुछ समय पहले देहरादून और मसूरी घूमने गए थे। उनको वहां पर इस बिजनेस के बारे में आइडिया आया। वे सिम कार्ड भी बेचा करते थे।
रितेश अग्रवाल को ओयो रूम खोलने का आइडिया टीवी के रिमोट कंट्रोल से आया था। उनका सोचना था जैसे टीवी को रिमोट से कंट्रोल किया जा सकता है। ऐसा ही कुछ होटल के लिए भी किया जा सकता है, जिससे घर बैठे कस्टमर को होटल मिल सके। इसी आइडिया से ओयो रूम्स की शुरुआत हुआ है। इसके लिए रितेश में स्वयं से बहुत मेहनत की। वे स्वयं हाउसकीपिंग से लेकर सीईओ तक का काम किया करते थे। उन्होंने गुड़गांव में पहला होटल शुरू किया था। वे उस समय ओयोरूम्स की ड्रेस पहनकर ड्यूटी करते और कस्टमर को कमरा दिखाते। इसमें उन्हें कई बार तो शाबासी भी मिली और कई बार कमरे से बाहर भी निकाला गया। लेकिन उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी। किसी भी परिस्थिति में उनका व्यवहार कस्टमर के साथ अच्छा ही रहा। उन्होंने कस्टमर की जरूरत और आवश्यकताओं को समझा और उसके हिसाब से काम किया।
ओयो पहले ओरावेल के नाम से जाना जाता था। वर्ष 2012में रितेश ने ओरावेल की स्थापना की। इस कंपनी का उद्देश्य ट्रैवलर्स को छोटी या मध्य अवधि के लिए कम दामों पर कमरों को उपलब्ध करवाना था। जिसे कोई भी आसानी से ऑनलाइन आरक्षित कर सकता था। कंपनी के शुरू होने के कुछ ही महीनों के अंदर उन्हें नए स्टार्टपस में निवेश करने वाली कंपनी वेंचर्स नर्सरी से 30 लाख का फंड भी प्राप्त हो गया। अब रितेश के पास अपनी कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए प्रर्याप्त पैसे थे। धीरे-धीरे उनकी कंपनी बढ़ी भी। लेकिन धीरे-धीरे किन्हीं परिस्थिति से उन्हें घाटा हुआ और ओरावेल बंद हो गई। लेकिन रितेश ने हार नहीं मानी। उन्होंने कारण को जानकार उसका निवारण निकालते हुए ओरावेल को फिर से 2013में लाॅच किया लेकिन नए नाम ‘ओयो रूम्स’ के साथ। जिसका मतलब होता है “आपके अपने कमरे”। ओयो रूम्स का उद्देश्य अब सिर्फ ट्रैवलर्स को किसी होटल में कमरा मुहैया कराना भर नहीं रह गया। अब वह होटल के कमरों की और वहां मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं की गुणवता का भी ख्याल रखने लगे और इसके लिए कंपनी ने कुछ मानकों को भी निर्धारित किया।
जिस सोच के साथ रितेश ने ओयो रूम्स की शुरूआत की थी उस सोच ने उन्हें करोड़ों की आमदनी के साथ-साथ प्रसिद्धि दिलाई। आज पर्यटकों की पहली पसंद ओयो रूम्स होती है। इसका कारण है कि ओयो रूम्स अन्य रूम्स की अपेक्षा सस्ते होते हैं। जबकि सुविधाएं वहीं होती है। रीतेश की मेहनत रंग लाई और सबकुछ वैसा ही हुआ जैसा वे चाहते थे। किफायती दामों पर बेहतरीन सुविधाओं के साथ ट्रैवलर्स को यह सेवा बहुत पसंद आने लगी।

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Vinisha Dhamankar

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