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अकेली महिला के प्रति समाज का नजरिया

 मंजू ओमर
मंजू ओमर
15th Jun, 2020

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सीमा अपने चार भाई-बहनों मैं सबसे छोटी थी। छोटी उम्र में ही उसके पति का देहांत हो गया । सीमा अभी पचास की उम्र भी पार नहीं कर पा।,ईं थीं और आकर्षक रंग-रूप की स्वामिनी भी थी ।जो सीमा पहले बहनों के घर बेधड़क चली जाया करती थी।अब उसे ऐसा महसूस होने लगा कि उसके जाने से उनके घर का माहौल बिल्कुल बदल जाता है । बहनों को शाय़द डर लगने लगा था कि कहीं हमारे पति छोटी बहन में रूचि न लेने लगें ।जबकि होना यह चाहिए था कि इतनी कम उम्र में ईश्वर ने उसके साथ ये नाइंसाफी की है तो उसका अधिक ध्यान रखने की आवश्यकता थी । धीरे धीरे सीमा को सबकुछ समझ आने लगा और अब उसने बहनों के यहां जाना आना कम कर दिया और अपने बच्चों के साथ समय बिताने लगी ।

समाज की सोच ही कुछ ऐसी है कि वह अकेली महिला को स्वीकार नहीं पाता । इसके अलावा अकेली महिला की किसी पुरुष से दोस्ती को भी अच्छी दृष्टि से नहीं देखता । महिला चाहे कितनी ही स्वचछ मानसिकता से पुरुष से दोस्ताना व्यवहार रखें उसे ग़लत तरीके से ही देखा जाता है ।इससेवि

विवाहिता पुरूष का जीवन तो प्रभावित होता ही है ,मगर अधिक तनाव अकेली महिला को क्षेलना पड़ता है । अकेले अकेले कहां जा रही हो , हमे साथ ले लो जहां जा रही हो ,,, जैसें जुमले अक्सर महिलाओं के लिए पुरूषों की तरफ से उजाले जाते हैं ।यह भी कहा जाता है कि कोई मिला नहीं होगा ,न जाने कहां कहां मुंह मारती रहती है ।ऐसी बातें पुरूष ही नहीं महिलाओं के द्वारा भी बोली जाती है । अकेली महिला को देखकर ही आपस में खुसर फुसर शुरू हो जाती है । समाज उससे एक स्वतंत्र जीवन जीने का अधिकार छीन लेता है । लोगों से उसकी स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता देखी नहीं जाती । उसके अस्तित्व पर सवालिया निशान लगने लगते हैं ।
अकेली महिला को इस बात के लिए सचेत रहना चाहिए कि हर पुरुष अच्छा दोस्त नहीं हो सकता । अगर किसी महिला की किसी विवाहित पुरुष से दोस्ती होती है तो सबसे अधिक परेशानी पुरुष साथी की पत्नी को होती है । विवाहिता महिलाऐअकेली महिला को अपने पति के लिए सबसे बड़ा खतरा मानती है । अकेली महिलाएं बताती है कि जब उन्होंने अकेले रहने का फैसला किया तो उनकी विवाहिता सहेलियों का रवैया उनके प्रति बदल गया ।
अकेली महिला कीपुरुषोसे दोस्ती में कोई बुराई नहीं है ,बशते दोस्ती की एक सीमा होती । बात दोस्ती से आगे न बढ़े । एकं एक अकेली महिला की पुरूषों से दोस्ती जोखिम भरी होती है । अगर दोनों तय कर लें कि अपने रिश्ते में एक सीमा रखेंगे । एक दूसरे के निजी जीवन में दखल नहीं देंगे और अपनी अपनी सीमा में रहे तो दोस्ती में कोई बुराई नहीं है ।
मंजु ओमर
क्षांसी

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