Bluepadपालतू जानवर और मानसिक तनाव !
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पालतू जानवर और मानसिक तनाव !

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Shruti More
14th Jun, 2020

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आपको यह सुनकर आश्यर्च होगा कि पालतू जानवर आपकी मानसिक परेशानियों को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका  निभा सकते हैं। लेकिन यह सच है। ऐसा हम नहीं मनोवैज्ञानिक बताते हैं। हालांकि वर्तमान समय में जानवरों को पालना एक फैशन भी बनता जा रहा है। आज अधिकांश व्यक्ति जानवरों को पालने का शौक रखते हैं। प्रायः घरों में कुत्ता, बिल्ली को आसान रूप से देखा जा सकता है।  इसके लिए जानवरों पर खर्चे भी किए जाते हैं। उनके खाने पीने से लेकर चिकित्सीय व्यवस्था पर भी खासा ध्यान रखा जाता है। ऐसा नहीं है कि ये पालतू जानवर हमारे लिए किसी काम के नहीं होते। जानवरों को पालने का यह फैशन अब आपके दीर्घजीवी रहने का कारण बन सकते हैं।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार जानवर पालनेवाले दीर्घजीवी होते हैं। मनोवैज्ञानिकों और चिकित्सकों की राय में युवाओं और बच्चों में पालतू जानवरों के प्रति जो प्रतिक्रिया होती है,उससे व्यक्तित्व के मानसिक समस्या के निदान में काफी सहायता मिल सकती है। अवकाशप्राप्त व्यक्तियों के निष्क्रिय जीवन में भी पालतू पशु की उपस्थिति परिवर्तन लाती है।
अमेरिकी मनोवैज्ञानिक डॉ. बोरिस लेविंसन ने अपने प्रयोगों द्वारा इसे सिद्ध भी किया है। उनके पास नियमित इलाज के लिए मानसिक रोग से पीड़ित एक बच्चा आया। इस दौरान डॉ. का पालतू कुत्ता भी वहीँ था। कुछ समय बाद वह बच्चा कुत्ते के साथ खेलने लगा। डॉ.लेविंसन ने कुत्ते के साथ उस बच्चे के खेल की गतिविधियों को बड़े ध्यान से देखा। उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि उस दिन वह बच्चा उनके इलाज के दौरान असामान्य रूप से संवेदनशील हो गया था।

डॉ. लेविंसन का विचार है कि पालतू जानवरों के माध्यम से किया जाने वाला इलाज उन बच्चों के इलाज में सबसे अधिक सहायक है,जो चुपचाप रहते हैं,हमेशा विघ्न डालते हैं और जिनका इलाज लगभग असंभव है।  इसके अतिरिक्त यह इलाज मानसिक रोगियों तथा उद्वेग से त्रस्त बीमारियों के शिकार लोगों के लिए भी सहायक हो सकता है। एक जानवर की उपस्थिति वातावरण को अधिक प्राकृतिक बना देती है, जिससे बच्चा स्वयं को काफी आरामदेह स्थिति में पाता है। उसे यह आभास नहीं होता कि कोई उसकी गतिविधियों का निरीक्षण कर रहा है।
लेविंसन की तरह सैमुएल तथा एलिजाबेथ कोर्सन ने भी एक घटना से यह पाया कि जानवर मनुष्यों के इलाज में किस तरह सहायक हो सकते हैं। इन दोनों मनोचिकत्सकों ने कुत्तों के व्यवहार का अध्ययन किया। कुछ मरीजों ने उनके अस्पताल के कंपाउंड में रहने वाले कुत्तों के साथ मन बहलाने की इच्छा और उनकी देखभाल करने की इच्छा प्रकट की। मरीजों की इच्छा को देखते हुए इन मनोचिकित्सकों ने 28 मरीजों को कुत्तों के देखभाल की अनुमति दी। इन मरीजों पर तब तक किसी भी उपचार का कोई प्रभाव नहीं हुआ था और उन्हें लाईलाज समझा गया था।लेकिन इस प्रयोग का उन अच्छा प्रभाव पड़ा।

इससे निष्कर्ष निकाला गया कि जानवर मरीजों में जिम्मेवारी की भावना को बढ़ावा देते हैं। साथ हीं वे उन्हें यह भी अहसास कराते हैं कि समाज के लिए वे बेकार नहीं हैं, बल्कि समाज को उनकी जरूरत है। उनके अनुसार,इस तरह के इलाज में मुख्य रूप से कुत्ते सहायक होते हैं, क्योंकि वे मरीज को अपना पूरा प्यार देते हैं। पालतू  जानवर मरीज का भावनात्मक स्तर बढ़ा देते हैं,जिससे मरीज अपने विषय में जरा अच्छे ढंग से सोचने लगता है।

शोध के अनुसार व्यक्ति जब अपने पालतू जानवर के साथ होता है तो उसका रक्तचाप सामान्य रहता है। कोई व्यक्ति जब पालतू जानवर के साथ होता है तो अधिकतर खामोश रहता है,जिससे उसे सुकून मिलता है। जब वह अन्य लोगों के साथ होता है तो वह बिना बोले नहीं रह सकता।

यह सत्य है कि स्पर्श से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है। जानवर स्पर्श को पहचानकर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं। प्यार के स्पर्श पर वे अपना प्यार देते हैं जबकि क्रोध होने पर उनकी प्रतिक्रिया गुस्से की होती है।

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