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परिचय दो अपना तुम कौन हो

एकान्त नेगी
एकान्त नेगी
14th Jun, 2020

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परिचय दो अपना तुम कौन हो !!!

कभी ख़ामोश तो कभी मौन हो !
कभी हिमालय की शीतल पौन हो
परिचय दो अपना तुम कौन हो !!!

अजंता-एलोरा में मेरी तलाश हो !
उषा फिर महकेगी मत निराश हो
तुम क्षितिज में खिलता पलाश हो !!!

कभी आसमान तो कभी जमीं हो !
कभी व्याकुल ख़्यालों की कमी हो
कभी सुबकती आँखों की नमी हो !!!

तन्हाईयों में मेरे दिल के पास हो !
सूनी-सूनी रातों में क्यों हताश हो
आंगन में महकता अमलतास हो !!!

खुशबू बनकर तू फिर महकेगी !
बचपन बनकर तू फिर चहकेगी
शृंगार रस पीकर फिर बहकेगी !!!

सावन में अब कोयल गाती नहीं !
दिल से क्यों तेरी याद जाती नहीं
तेरे सिवा कोई तस्वीर भाती नहीं !!!

जब बेचैन होके घटायें गरजती हैं !
जब भीगे सावन में बूँदें बरसती हैं
सखी मिलन को आँखें तरसती हैं !!!

यूं नज़रें झुकाकर मत जाया करो !
चोरी-चोरी दिल में मत आया करो
ख़ामोशियों में धुन कोई गाया करो !!!


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