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समंदर के राज

Bhawna Nagaria
Bhawna Nagaria
14th Jun, 2020

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समंदर के अनोखे मिजाजको,
आज तक कहां कोई समझ पाया है,
बेहिसाब नदियों ने अपना,
मीठा पानी इसमे दफनाया है,
फिर भी न जाने क्यों,
अपने मे ये खारापन समाया है,
अंनत अपार सीमा है इसकी,
फिर क्यों नही यह बह पाया है।

समंदर की गहराई की ,
थाह भी कहाँ कोई पा पाया है,
एक रहस्यमयी दुनिया का इसने,
अपना एक अलग संसार बसाया है,
अनमोल रतन और मोती समाये इसमे,
फिर भी क्यूँ नही ये इतराता है,
जितना गहरा उतना ही शांत,
शायद हमे ये यही सिखाता है।

लहरों और सागर का मेल भी,
कहाँ कोई समझ पाया है,
दोनों के हैं अलग मिजाज,
फिर भी ये तो साथ निभाता है,
खुद को रखकर बेहद शांत,
उन्हें अठखेलियाँ करवाता है,
अपने साहिल से है शायद अंजान,
पर लहरों को साहिल से मिलवाता है।

हां, समंदर केअनोखे राजको,
कहाँ कोई समझ पाया है,
कितनी ही हो ग्रीष्म अपार,
फिर भी क्यूँ नही ये सूख पाता है,
बादल बनकर इसका पानी,
फिर नदियों की प्यास बुझाता है,
उनकी मिठास उनको देकर,
फिर ये अपना फर्ज निभाता है ।

हां,समंदर के मिजाज को,
कहाँ कोई समझ पाया है,
दूर गगन से मिलने की ख्वाहिश मे ही,
ये अकसर खामोश रहता है,
और इसी जुदाई के गम मे,
शायद अकसर तन्हा तन्हा रोता है,
और शायद यही वजह हो कि ,
इसमें हरदम खारापन ही रहता है ।

हाँ ,समंदर के मिजाज को ,
कहाँ कोई समझ पाया है ,
जब जब इसने़ विद्रोह दिखाया है,
फिर कहाँ कोई बच पाया है,
सारी सीमाओं को तोड़कर ,
फिर भयंकर उत्पात मचाया है ,
जर्रा जर्रा थर्राया है,
कहाँ इसे कोई फिर रोक पाया है ।

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