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ऐ दिल
Nasir jamal
Nasir jamal
23rd Jun, 2022

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ऐ दिल संभल कर चल
न ऐतबार किसी का कर
क़दम क़दम पर धोखे हैं
मीठी बातों से बच कर चल
चाशनी में डूबे हुए
खंजर होते हैं
तीर लफ़्ज़ों के बहुत दर्द भरे होते हैं
आजू बाजू से हट कर चल
ऐ दिल संभल कर चल
आज का दौर बहुत नाज़ुक है
कुछ पता ही नहीं
कौन अज़ीज़ है कौन रक़ीब है
नज़र ए बद से संभल कर चल
न संभला, तो हाथ मले गा कल
NJ Writes...
ऐ दिल

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