Bluepadक्या होगा बेवजह रोने से
Bluepad

क्या होगा बेवजह रोने से

एकान्त नेगी
एकान्त नेगी
13th Jun, 2020

Share


फर्क तो पड़ता है तेरे घर में होने से,
अब न सम्भला तो क्या होगा रोने से।

बेवजह क्यों झांक रहा है इधर उधर,
आवाज़ आती है घर के हर कोने से।

मेरा ये नुस्खा आज़मा कर देख लेना,
दुश्मन दूर रहे बार-बार हाथ धोने से।

ये ज़िन्दगी फिर कहाँ मिलेगी मेरे यार,
कुछ न हासिल हुआ मायूसी बोने से।


बेहतर है घर में ही कैद रह कुछ दिन,
बहुत दर्द होता है अपनों को खोने से।

तन्हाईयों से हो गुफ़्तगू का सिलसिला,
सुकून मिलेगा चादर तान कर सोने से।

बाहर जाने की जिद्द न कर 'एकान्त',
कभी सोचना क्या होगा तेरे न होने से।


9 

Share


एकान्त नेगी
Written by
एकान्त नेगी

Comments

SignIn to post a comment

Recommended blogs for you

Bluepad