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यहाँ हुक्म है किसीका

एकान्त नेगी
एकान्त नेगी
13th Jun, 2020

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(कोरोना विशेषांक)

हुक्म यहाँ किसी का घर से नहीं निकलना। ।
पड़ोसन की शोख अदा पर मत फिसलना॥

जानें क्यों अजीब-सी घुटन हैं इन हवाओं में।
सांसें भी सिकुड़कर जैसे भूल गई है खिलना॥

दुश्मन घात लगाकर बैठा है तेरी चौखट पर।
नाम लेकर पुकारेगा मगर उससे न मिलना॥

शैतान फितरत की जुंबिशों पर बंदिश लगा।
गर्दिशों की चाहतों की गर्मीं में मत पिघलना॥

कातिल बनकर घूम रहा इक अनजान चेहरा।
मगर कफ़न बाँध हद से बाहर मत निकलना॥

दिल बहलाने की कोई वजह घर में ही तलाश।
मगर बेनाम मौत के इशारों पर मत फिसलना॥

कभी घर की दीवारों से कुछ गुफ्तगू कर लेना।
कभी 'एकांत' में पुरानी यादों के संग टहलना॥

(एकान्त नेगी)

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