Bluepadएक नन्हा सा पौधा जो अंकुरित होना चाहता है ।
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एक नन्हा सा पौधा जो अंकुरित होना चाहता है ।

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Nitesh kumbhkar
13th Jun, 2020

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भविष्य तुम्हारे जीवन का में
सुनो वेदना मेरी भी
नन्ही -नन्ही कोंपले थी मेरी
नन्ही सी एक टहनी थी
सुनो वेदना मेरी भी तुम सुनो वेदना मेरी भी
हल्की हल्की धूप खिली थी
नन्ही सी बूंदों की अठखेली थी
अंकुर बना बीज से में भी
वृक्ष कल्पना मेरी थी
हुआ उदय जीवन का मेरे
क्या गलती इसमे भी मेरी थी
लगा लिया हो वृक्ष भले ही
मगर उसके प्राणों की रक्षा अब भी एक पहेली थी
प्यासी धरा पर तप -तप कर
बूंदों की तृष्णा झेली थी
सुनो वेदना मेरी भी तुम सुनो वेदना मेरी भी
आह मेरी तुम सुन लेते
कुछ बूंद मुझे तुम जल देते
आश्रय बनाते टहनी को मेरी
जीवांत मुझसे तुम वर लेते।

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Written by
Nitesh kumbhkar

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