Bluepad‘कोरोना’ ने किसानों को किया तबाह
Bluepad

‘कोरोना’ ने किसानों को किया तबाह

Anjela Pawar
Anjela Pawar
18th Apr, 2020

Share



लॅाकडाउन के कारण किसानों की स्थिति दयनीय होते जा रही है। सरकार द्वारा किसानों को हरसंभव सहायता देने की बात कही जा रही है। लेकिन ये किसानों को भी पता है कि कोई भी सरकार उनकी हरेक जरूरतों को पूरा नहीं कर सकती। भारत कृषि प्रधान देश है। यहां का मुख्य व्यवसाय कृषि है। कृषि में अच्छी पैदावार के बाद ही किसान देश के लिए और अपने लिए कुछ कर पाता है। लॅाकडाउन के कारण फसलें बर्बाद हो रही है। किसानों द्वारा अपने फसलों को बचाने की सारी मेहनत बेकार हो रही है। आंखों के सामने फसल बर्बाद हो रही है लेकिन वे कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं।
भारत में मार्च-अप्रैल के महीने में कई फसलें कटने के लिए तैयार हो जाती हैं। जैसे- गेहूं, चना, ज्वार, संतरा, मौसमी, गन्ना इत्यादि। कई फसलों को बोआ भी जाता है। इस समय किसान मजदूरों की मांग अधिक बढ़ जाती है। बहुत जगह फसल कटाई के समय बाहर रहनेवाले मजदूर अपने गांव आकर फसल कटाई में अपने परिवार की मदद करते हैं। लेकिन इस बार लॅाकउाउन के कारण कई प्रकार की समस्याएं आ रही है। ‘कोरोना’ महामारी ने सारी फसलों के मेहनत पर पानी फेर दिया।
अभी गर्मी का मौसम चल रहा है। इस मौसम में गन्ने की फसल होती है। इस मौसम में किसान गन्ने के फसल को काटकर चीनी मिलों में भेजते हैं। चीनी मिलों में काम कर रहे मजदूर उसे चीनी बनाने की प्रक्रिया से गुजारते हैं। कुछ गन्नों को बाहर भेज दिया जाता है। गर्मी में गन्ने का रस काफी पसंद किया जाता है। सस्ता होने के कारण यह गरीबों की पहुंच में रहता हैं। गन्ने का रस गर्मी में राहते देती है। परंतु वर्तमान लॅाकडाउन की स्थिति में गन्ने के व्यवसाय पर काफी असर पड़ा है।
इसी संदर्भ को समझने के लिए बात करते हैं गन्ना के हब गुजरात की। पूरे दक्षिण गुजरात से सालाना करीब 90 लाख क्विंटल गन्ना चीनी मिलों में भेजा जाता है, जिसमें भरूच, नर्मदा, सूरत, तापी वलसाड़, नवसारी और डांग के कुछ हिस्से शामिल हैं। 21 दिन की लॉकडाउन को घोषणा के बाद अधिकांश मजदूरों ने अपने घरों की तरफ रुख कर लिया, जिससे आखिरी चरण में किए जाने वाली कटाई नहीं हो पाई। यहां गन्ना की कटाई करने के लिए अधिकांश मजदूर डांग या महाराष्ट्र से आते हैं। कटाई के बाद वे तुरंत अपने घर की तरफ निकल जाते हैं। परंतु ये मजदूर गन्ना कटाई से पहले ही अपने घर निकल गए। इस कारण से इस वर्ष गन्ना कटाई के सारे समीकरण गड़बड़ा गए।
गन्ने की खेती की कटाई अप्रैल तक खत्म हो जानी चाहिए थी। परंतु मजदूरों के लॅाकडाउन में घर चले जाने के कारण कई लोग गन्ना काट हीं नहीं पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में गन्ने की फसल चीनी मिलों तक नहीं पहुंच पा रही है। वहीं गन्ना बाहर भी नहीं जा पा रहा है। जो गन्ना बाहर जा रहा है उसकी खपत नहीं हो रही है। क्योंकि लॅाकडाउन के कारण जनता घड़ों में है ऐसे में छोटे गन्ना मजदूर उसका गन्ना के जूस से कमाई नहीं कर पा रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर किसानों की चिंता इस बात को लेकर है कि अगर जल्द लॉकडाउन नहीं खत्म हुआ तो उनकी फसल खड़े खड़े खराब हो जाएगी। वहीं लोकल स्तर पर भी डर के कारण मजदूर किसी भी प्रकार की जोखिम उठाना नहीं चाहते।
समस्या यह है कि अगर गन्ने की कटाई नहीं होती है तो किसानों के साथ समस्याएं बढ़ती ही जाएंगी। इस उद्योग से जुड़े सभी मजदूरों को परेशानी होगी। फसल की कटाई नहीं होने फसल बर्बाद हो जाएगी। ऐसी स्थिमि में फसल की कटाई से जुड़े मजदूरों को भी कटाई के पैसे नहीं मिलेगे। वहीं चीनी के दामों में भी बढ़ोत्तरी होने के अनुमान हैं।
गन्ना के फसल पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद भी किसानों को अपनी मेहनत का फल नहीं मिल पा रहा है। फसल बर्बाद हो रही है। मजदूरों काम पर नहीं जा पा रहे हैं। इसकारण से उनके जीवन-यापन पर समस्या उत्पन्न हो गई है। किसानों के साथ पूरा परिवार परेषानियों में घिर गया है। वहीं दूसरी ओर चीनी के दाम अधिक होने का अंदेशा भी है। ये समस्या सिर्फ एक किसान या एक फसल से जुड़ी किसान की नहीं है बल्कि अधिकतर किसानों की है।

1 

Share


Anjela Pawar
Written by
Anjela Pawar

Comments

SignIn to post a comment

Recommended blogs for you

Bluepad