Bluepad🌻डूबते हुए सूरज🌻
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🌻डूबते हुए सूरज🌻

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sarika johari
12th Jun, 2020

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कहते हैं कि उगते हुए सूरज को सभी सलाम करते हैं लेकिन डूबते हुए सूरज को कोई देखता भी नहीं।हमारे देश में बुजुर्गों का भी यही हाल है वो भी डूबते हुए सूरज की तरह है जिन्हें उनके बच्चे देखना भी नहीं चाहते और उगते हुए सूरज अर्थात अपने बच्चों में ही मस्त रहते हैं।
घर के बुजुर्ग तो बस एक पुराने सामान की तरह हो गये हैं जो बस एक कोने में चुपचाप पड़े रहते हैं।हम अपने आप ही यह सोच लेते हैं कि हमारे माता-पिता या दादा-दादी का अपना कोई मन नहीं, उनकी कोई खुशी नहीं जबकि उनका भी मन होता होगा कि अपने परिवार के साथ घूमने जायें समय बितायें पर उनसे पूछता कौन है ;न तो आजकल के बच्चे उन्हें अपने साथ कहीं ले जाना चाहते हैं और न ही घर पर उनके साथ समय बिताना चाहते हैं।क्योंकि इसके लिए किसी के पास समय ही नहीं है।

उम्र के इस पड़ाव पर हमारे बुजुर्गों को सबसे ज्यादा अपने बच्चों के साथ की ही जरूरत होती है।जितना समय हम खुशी-खुशी अपने बच्चों के साथ बिताते हैं अगर उसका 50%भी अपने बुजुर्गों के साथ बिता लें तो शायद हम उन्हें बहुत सारी खुशियां दे पायेंगे ।कभी-कभी डूबते हुए सूरज को भी सलाम कर लेना चाहिए क्योंकि जब सूरज डूबता है तभी रात आती है और हम रात की उस गोद में सुकून से सोते हैं एक नई सुबह के इंतजार में इसलिए अपने बुजुर्गों का खूब खयाल रखना चाहिए।🌹🌹


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