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शिलवाण बनकर भी क्यां मै आपका शिष्य ना कहलाऊ..!
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Anil Fulzele
15th May, 2022

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मनाता हुं जयंती....१४अप्रेल को..|
भुलं भी जाता हुं....१५अप्रेल को..|
साल भर बाद फिर से याद आये हो..|
दिन ढलते ही भुले-बिसरे होतं जाते हो..|
तुमने तो सिखाई थी......
प्रज्ञा-मैत्री और करुना......!
स्वातंत्र्य-समता और बंधुता....!
गवा दी मैत्री
छोड थी बंधुता
समता और करुणा का
तो अता भी नही....
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तो बताईये ना बाबा क्या मै अभी भी शिष्य हुं आपका ?
.......................................................................
दो बिघों के लिये भाई को लताडा
मां-बाप कों वृद्धाश्रम खदेडा़
और प्रताडीत किया पत्नी को भी..
मोह-जाल भारी दहेज का बखेडा़..
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तो बताईये ना बाबा क्या मै अभी भी शिष्य हुं आपका ?
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टेबल के अंदर से
बंद लिफापा देता हुं |
फिर भी समाज में
Sofisticated कहलाता हुं |
गाओं ना मेरे साथ
नाचो ना मेरे साथ
सिना चौडां कियें
फेकते रहता हुं..|
स्वार्थलोलूलपता
दिल में समाता हुं..|
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तो बताईये ना बाबा क्या मै अभी भी शिष्य हुं आपका..?
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दो ठों भाषन करके..
नेता कहलाता हुं..|
प्रकाशक को पैसां दे के
किताबे छपवाता हुं..|
और गौर से सुनिए...
पुरस्कार प्राप्त साहित्यिक भी हो जाता हुं..!
और पुरस्कार प्राप्त साहित्यिक भी हो जाता हुं..!
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तो बताईये ना बाबा क्या मै अभी भी शिष्य हुं आपका
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मेरी ही सुनो ऐसी रट लगाता हुं..|
नहीं सुने तो गुस्सा हो जाता हुं..|
चलते-चलते साथी कों गिरा देता हुं..|
फिर भी नंबर वन कहलाता हुं..|
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तो बताईये ना बाबा क्या मै अभी भी शिष्य हुं आपका..?
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झुंट बोलकर खुप इतराता हुं..|
अपने आप को चालाक कहलाता हुं..|
शाम ढलते ही राते रंगीन कराता हुं..|
और छलके जामं में तस्वीर आपकी ही देखता हुं...|
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तो बताईये ना बाबा क्या मै अभी भी शिष्य हुं आपका...?
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क्यों न आजसे ही...
संकल्प करु सत्य का
क्यों न आजसे ही...
निश्चय करु समता का
क्यो न आजसे ही...
निश्चय और दृढ करु
मानवता का....|
क्यो न अभि से ही
प्रज्ञावान बनू
अपनाऊ पंचशील
और..
बढाउ कदम
अठ्ठशील कि और...
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तो क्या बाबा.......
शीलवान बनकर भी..
क्या मै....
आपका शिष्य ना कहलाऊ.....!
तो क्या बाबा....
शीलवान बनकर भी
क्यां मै..
आपका शिष्य ना कहलाऊ...!!!!
!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
........अनिल फुलझेले
!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

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Anil Fulzele

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