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प्रेम का प्रतीक
उत्सव
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15th May, 2022

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मैं उन तमाम लोगों से एक सवाल पूछना चाहता हूं। जो कि ताजमहल को प्रेम की निशानी बताते हैं,और शाहजहां को इस विश्व का सबसे महान प्रेमी बताते हैं।
उन लोगों से मेरा बस एक सवाल है कि आखिर किस प्रकार से ताजमहल प्रेम की निशानी है?
शायद आप लोगों को यह पता नहीं होगा कि मुमताज शाहजहां की पहली पत्नी नहीं थी।शाहजहां कई सारी रानियां थी। और मुमताज के भी शाहजहां कोई पहले पति नहीं थे।शाहजहां मुमताज के दूसरे पति थे।अगर मुझसे पूछा जाए कि आप इस विश्व में सबसे महान प्रेमी किसे मानते हैं ,और आपके लिए प्रेम का सबसे खूबसूरत चीज क्या है।तो मेरा उत्तर होगा इस दुनिया में सबसे महान प्रेमी राम है।राम पति से ज्यादा एक महान प्रेमी थे।जिन्होंने मां सीता के लिए समुद्र पर बांध बनवाया। और उसके बदले में उन्होंने किसी भी वानर के हाथ नहीं काटे।ताजमहल को हम प्रेम की निशानी मानते हैं।लेकिन ऐसा प्यार किस काम का जो महल बनवाने वालों के हाथ कटवा दे। उन कलाकारों ने पत्थर में से कई सारे ईश्वर की मूर्ति को उकेरा था। उनकी कला देखने योग्य थे।उनके द्वारा उकेरी गई मूर्ति को देखने के लिए ना जाने कहां-कहां से लोग आते थे।उनके द्वारा उनके परिवार का भरण-पोषण होता था।और उस निर्दयी शाहजहां ने उनसे महल बनवा कर उनके हाथों को काट दिया।उन मजदूरों के हाथ कटने से उनके परिवार भूख से तड़प के मर गए। जिन हाथों ने जीवन भर ईश्वर की मूर्ति को उकेरा।उन हाथों को कटवाने वक्त निर्दयी शाहजहां ने एक बार भी नहीं सोचा‌। उस निर्दयी को ना जाने कितने ही मासूमो की हाय लगी होगी।उस महल को हम लोग प्रेम का प्रतीक मानते हैं। नहीं वह महल प्रेम का प्रतीक नहीं हो सकता है बल्कि घृणा का प्रतीक हो सकता है। इससे बड़ा प्रेमी तो बिहार का दशरथ मांझी था।जिसकी पत्नी की समय रहते हुए डॉक्टर के पास नहीं पहुंच सकी,क्योंकि उसके घर से अस्पताल दूर पड़ता था।उनके गांव से अस्पताल की दूरी इसलिए अत्यधिक पङती थी क्योंकि बीच में एक पहाड़ पङता था।अगर उस पहाङ के बीच से रास्ता होता तो शायद उनकी पत्नी बच जाती।परंतु उन्होंने अपनी पत्नी को अपने आंख के सामने मरता हुआ देखा।और उन्होंने अपनी पत्नी की याद में खुद से छेनी और हथौड़ी लेकर उस पहाड़ को काटने लगे। और उस पहाड़ को काटकर उसके बीच से रास्ता बना डाला।
परंतु फिर भी हम प्रेम का प्रतीक उस बांध को या उस रास्ते को नहीं मानेंगे। हम विश्व का महान प्रेमी राम को या दशरथ मांझी को नहीं मानेंगे। क्यों?क्योंकि इन्होंने किसी बेगुनाह का खून नहीं बहाया। किसी पत्नी से उसका पति,किसी माता से उसका पुत्र,किसी बहन से उसका भाई नहीं छीना।
हम प्रेम का प्रतीक उस ताजमहल को ही मानेंगे जिसके कारण कितने ही बेगुनाह मारे गए।

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