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बंधन में होना बाध्य नहीं
उत्सव
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14th May, 2022

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माता सीता अशोक वाटिका में बंधन में जरूर थीं, लेकिन बाध्य नहीं थीं। जब जब रावण ने अपनी मर्यादा लांघनी चाही, उन्होंने रावण को याद दिलाया कि अगर तुम लंकापति हो तो मैं भी अयोध्यापति की पत्नी हूं।कोरोना मनुष्यता का शांतिकाल
कोरोना काल मनुष्यता का शांतिकाल था। इसमें वही लोग परेशान हुए जो बाजार से जुड़े हुए थे। जिनको अपनी संस्कृति और परिवार से लगाव था, वह शांति में थे। कोरोना ने उन देशों को प्रकृति की ताकत का एहसास करा दिया जो अपनी शक्ति को पूरे विश्व के सामने बताते थे। एक अदृश्य शत्रु ने उनकी सीमा में पहुंचकर व्यवस्था को चुनौती दे दी। बड़ी बड़ी मिसाइलें धरी की धरी रह गईं।
राम मंदिर में सीता माता भी हो साथ
डॉ. विश्वास ने कहा कि मैं राम मंदिर का निर्माण कराने वालों से कहना चाहूंगा कि अयोध्या ने बन रहे राम मंदिर में सीता माता का साथ होना जरूरी है। उनके बिना प्रभु श्री राम का मंदिर अधूरा रहेगा।
राम एक महानप्रेमी
उन्होंने कहा कि राम पति से ज्यादा एक महान प्रेमी थे, जिन्होेंने मां सीता के लिए समुद्र पर पत्थरों से बांध बनवाया। ताजमहल को हम प्रेम की निशानी मानते हैं, लेकिन ऐसा प्यार किस काम का जो महल बनाने वालों के हाथ कटवा दिए गए। इससे बड़ा प्रेमी तो बिहार का दशरथ मांझी था, जिसने अपनी पत्नी की याद में पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया।

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