Bluepadबेटा-बेटी में समानता, सशक्त राष्ट्र का निर्माण
Bluepad

बेटा-बेटी में समानता, सशक्त राष्ट्र का निर्माण

Surekha Bhosale
Surekha Bhosale
11th Jun, 2020

Share



देश तरक्की कर रहा है। परिवार, समाज सभी की सोच बदल रही है। लेकिन इन बदले हुए समय में भी कुछ सोच नहीं बदला। वह सोच है बेटा और बेटी में फर्क का। अभी भी कुछ लोग इस सोच को मानते हुए चल  रहे है कि बेटा को बेटियों से ज्यादा मान जाए। इसके पीछे का तर्क हमेशा यह दिया जाता है कि बेटी तो परायी होती है बेटा अपना होता है। या बेटा से वंश चलता है बेटियों से नहीं। सोचने की बात है कि अगर अभी भी यह सोच अगर हमारे समाज में चल रही है तो समाज गलत दिशा की ओर जा रहा है।

बहुत लोगों यह सोचते हैं कि मैं बेटी को बेटों के समान क्यों मानूं? तो इसका जवाब एक नहीं कई हो सकते हैं। यह माना जाए या ना माना लेकिन सत्य तो यह है कि एक बेटी एक बेटों की जन्मदात्री होती है। अर्थात् एक लड़की हीं होती है जो इस धरती पर जीव को पैदा करने की क्षमता रखती है। वह औरत हीं होती है जो एक जीव को अपने गर्भ में नौ महीने तक रखती है। इतना ही नहीं उस जीव के जन्म से लेकर जीवन पर्यन्त उसकी देखभाल करती है। जो इतने जिम्मेवारियों को धारण करती है उसे ऊंचा दर्जा ना दिया जाए तो यह विचारणीय होगा।

एक लड़की अपने जीवन में कई जिम्मेवारियों का निर्वाह करती है। उससे हमेशा यह उम्मीद लगाई जाती है कि वह सभी जिम्मेवारियों का निर्वहन करेगी और वह करती भी है। जैसे-बेटी, बहन, मां, बहू, पत्नी, दोस्त और ना जाने कितने रिश्ते। वह सभी रिश्तों को बहुत हीं सधे और सही तरीके से निभाती है। संभवतः अगर महिलाएं इन जिम्मेवारियों को सही से निभा पाती है तो इसके पीछे का कारण उनके साथ किया गया समान व्यवहार ही है। जब घर में बेटों और बेटियों में समान नजरिया रखा जाता है तो उनके साथ समान व्यवहार किया जाता है। जैसे- समान स्कूल, समान पढ़ाई, समान पाबंदी, समान सोच इत्यादि।

कहा जाता है कि एक महिला परिवार की नींव होती है। अगर परिवार की नींव सही हो तो परिवार की मजबूती कई गुणा बढ़ जाती है। यह सही भी है। एक महिला ही है जो एक परिवार को अपने सोच, समझदारी, त्याग, बलिदान से सीचतीं हैं। अगर एक परिवार मजबूत होगा तो एक समाज मजबूत होगा। समाज मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा। इसलिए मजबूत देश के लिए जरूरी है कि एक लड़की को मजबूत किया। लड़की को मजबूत किया जाए ना कि मजबूर। अगर एक लड़की की पैदाईश और पालन-पोषण लड़कों के समान होती है तो उनमें हीन भावना जन्म नहीं लेती। वो मुक्त रूप से सोच सकती हैं। सही निर्णय ले सकती हैं। एक सकारात्मक कदम की ओर बढ़ सकती है।

एक मजबूत लड़की हीं हमारे समाज को सकारात्मक दिशा की ओर ले जा सकती हैं। आज हमारे समाज में बहुत सारे अपराध हो रहे हैं। जैसे-बलात्कार, हत्या, घरेलू हिंसा इत्यादि। एक मजबूत लड़की हीं लोगों के सोच को बदलने का मादा रखती है। अगर महिला को पुरूषों के समान माना जाए तो समाज में हो रही गलत गतिविधियों पर भी रोक लगा सकते हैं। एक महिला को अगर बेटों के समान माना जाए तो वे हरेक जिम्मेवारियों को बखूबी निभा सकती है।

लोगों की यह सोच कि बेटी पराई होती है उसे दूसरे घर जाना होता है सही है लेकिन यह बात भी उतनी सच है कि बेटियां अपने माता-पिता की जितनी देखभाल कर सकती है संभवतः बेटों द्वारा ना की जाए। बेटियां कही भी रहे वह हमेशा अपने माता-पिता के प्रति चिंतनशील रहती है। एक फैमिली बांॅडिंग बनाती है। अगर आप अपने बेटियों को सही दिशा देगें तो यह सीख आगे तक जाएगी।

6 

Share


Surekha Bhosale
Written by
Surekha Bhosale

Comments

SignIn to post a comment

Recommended blogs for you

Bluepad