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क्या सुरक्षित घोषित होगी वोडाफोन-आइडिया ?

Shreyansh Jain
Shreyansh Jain
10th Jun, 2020

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वोडाफोन भारत की तीन सबसे प्रमुख टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स कंपनियों में से एक है। ब्रिटिश टेलीकाॅम इस कंपनी की परेशानियां कम होने का नाम हीं नहीं ले रही है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े आदेश के बाद  सरकार के एजीआर भुगतान राशि को लेकर परेशानी झेल रही वोडाफोन पर भारत छोड़ने और कंपनी बंद होने का खतरा भी मंडराने लगा है। हालांकि ऐसा होता है तो भारत को विदेशी निवेश को आकर्षित करने की सरकार की मुहिम को भी गहरा झटका लग सकता है। कंपनी की स्थिति के बारे में अधिक जानने के लिए इसकी पृष्ठभूमि को जानना आवश्यक है।

2007 में वोडाफोन ने पूरे दमखम के साथ भारत में की थी। वोडाफोन ने ने उस दौर में भारत के मार्केट में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली कंपनी हचिसन एस्सार का अधिग्रहण किया था। हचिसन भारत में हच ब्रैंड नेम के साथ कारोबार कर रही थी। वोडाफोन ने हचिसन में 67 पर्सेंट हिस्सेदारी 10.9 अरब रुपये में खरीदी थी। उस समय वोडाफोन का बोलबाला था। उस वक्त मार्केट में सिर्फ टेलीकॉम सर्विसेज ही नहीं शुरू कीं बल्कि फोन बेचने भी शुरू किए थे। हालांकि भारत आते हीं वह सूकुन से नहीं रह पाई। यहां आते ही वोडाफोन एजीआर के मामले में फंस गई, जो विवाद 1999 से ही कंपनियों और सरकार के बीच चल रहा था। एजीआर में आपको बता दें कि यह एक तरह का रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल है, जिसके मुताबिक कंपनियों को अपनी कमाई का एक हिस्सा अडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू के तौर पर सरकार को देना होगा।

वोडाफोन और सरकार के बीच इसी कैलकुलेशन को लेकर मामला फंसा है। वहीं दूरसंचार विभाग ने वोडाफोन आइडिया से एजीआर बकाये को लेकर करीब 53 हजार करोड़ रुपए की मांग की है। इसमें ब्याज, जुर्माना तथा राशि के भुगतान में की गई देरी पर ब्याज भी शामिल है। एजीआर बकाये को लेकर वोडाफोन-आइडिया का कहना है कि उस पर केवल केवल 21533 करोड़ रुपये की देनदारी बनती है। वोडाफोन-आइडिया ने कहा कि उसके समायोजित सकल राजस्व की देनदारियां उसके स्व-मूल्यांकन के हिसाब से 21,533 करोड़ रुपये है और बकाया की गणना दूरसंचार विभाग के पास दर्ज करा दी गई है। कंपनी के मुताबिक वित्त वर्ष 2006-07 से लेकर वित्त वर्ष 2018-19 तक 6,854 करोड़ रुपये और फरवरी 2020 तक के ब्याज सहित कुल मिलाकर 21,533 करोड़ रुपये का बकाया था। इसमें 17 फरवरी को 2,500 करोड़ रुपए और 20 फरवरी को एक हजार करोड़ रुपए और इसके बाद 3,354 करोड़ राशि का भुगतान कर दिया है। कंपनी ने कहा कि वह एजीआर देनदारी के स्वआकलन की रिपोर्ट दूरसंचार विभाग को छह मार्च को सौंप चुकी है। मूल राशि का भुगतान कर दिया गया है। इसी राशि भुगतान को लेकर मामला कोर्ट में चल रहा है।

वोडाफोन पहले से ही घाटे में चल रही है। वैसी स्थिति में देनदारी के पैसे से उसकी मुश्किलें बढ़ती जा रही है। हालांकि कंपनी की ओर से इन मुश्किलों से निकलने के प्रयास किए जा रहे हैं। बाजार में अन्य टेलीकाॅम कंपनियों के इंट्री के बाद उसकी स्थिति और खराब होते जा रही है। पहले से ही घाटा झेल रही वोडाफोन के लिए सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद मुश्किलें और बढ़ गई है। परेशानी झेल रही वोडाफोन-आइडिया ने लिमिटेड ने कहा है कि यदि सरकार उन्हें राहत नहीं देती है तो कंपनी भारतीय बाजार से अपना कारोबार समेटने पर भी विचार कर सकती है। इसके अलावा कंपनी दिवालिया कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकती है। अगर वोडाफोन आइडिया लिमिटेड दिवालिया प्रक्रिया में जाती हैं तो कंपनी में काम करने वाले 13 हजार कर्मचारियों की नौकरी पर संकट आ सकता है। कंपनी दिवालिया कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकती है। इसकी कीमत बैंकों को चुकानी पड़ी सकती है।

हालांकि वोडाफोन आइडिया स्वयं के संकंट और कोरोना संकंट के घड़ी में भी अपनी ओर से राहत देने का प्रयास कर रही है। लॉकडाउन के माहौल में कंपनी ने अपने कुछ यूजर्स के लिए राहत का ऐलान किया है। कंपनी ने अपने कम आय वाले फीचर फोन प्रीपेड ग्राहकों के लिए यह ऑफर पेश किया है, ताकि वह लॉकडाउन के इस माहौल में अपने करीबियों से कनेक्टेड रहें। दरअसल, इस ऑफर में कंपनी उन ग्राहकों के प्लान की वैधता बढ़ा रही है, जिनका प्लान लॉकडाउन के दौरान समाप्त हो रहा है। यही नहीं, कंपनी उन ग्राहकों की आउटगोइंग कॉल जारी रखने के लिए अतिरिक्त टॉक टाइम भी देगी। इस ऑफर का फायदा करीब 10 करोड़ यूजर्स तक पहुंच सकता है। कंपनी ने अपने प्रीपेड प्लान की वैधता फीचर फोन यूजर्स के लिए 17 अप्रैल तक बढ़ा दी है। यह सुविधा उन यूजर्स के लिए है जिनके प्लान इससे पहले खत्म हो रहे थे। इस दौरान ग्राहक इनकमिंग कॉल प्राप्त करते रहेंगे।

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