Bluepadस्वच्छ भारत !
Bluepad

स्वच्छ भारत !

S
Sakshi Sharma
9th Jun, 2020

Share



भारत हमेशा से स्वच्छता का अगुआ रहा है। हमारे पूर्वज स्वच्छता को लेकर हमेशा जागरूक रहे हैं। तभी तो हमेशा हमें बुर्जगों द्वारा स्वच्छता की सीख दी जाती थी। जैसे- बाहर से आने पर हाथ-पांव साफ करना, अपने शरीर को साफ रखना, अपने घर और पास पड़ोस को साफ रखना, हमेशा साफ कपड़े पहनना इत्यादि। कई ऐसी सीख दी जाती थी जो कई बीमारियों से बचाव के लिए कारगर होती है। वर्तमान में यही सीख अभी ‘कोरोना’ से लड़ने के लिए हमे दी जा रही है।

महात्मा गांधी ने कहा था, स्वतंत्रता से भी अधिक महत्त्वपूर्ण है स्वच्छता। हर किसी को साफ, स्वच्छ और स्वस्थ भारत के निर्माण में भागीदार बनना होगा। सरकारी, गैर-सरकारी और निजी तौर पर गंभीरता से प्रयास करने होंगे। जब वातावरण साफ स्वच्छ होगा, तो जनमानस भी स्वस्थ होगा। भारत को निर्मल बनाने के लिए देश के प्रत्येक व्यक्ति को योगदान देना होगा। सरकारी, गैर-सरकारी संस्थाओं और देश के जागरूक नागरिकों को आगे आकर स्वच्छ भारत की पहल को एक राष्ट्रीय अभियान में बदलना होगा तभी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का निर्मल भारत का सपना साकार हो सकेगा।

स्वच्छता का अर्थ शारीरिक और मानसिक शुद्वि है। वर्तमान में सरकार स्वच्छता को लेकर काफी प्रयासरत है। स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की शुरूआत की थी। अभियान के तहत भारत को स्वच्छ बनाने की मुहिम चलाई गई थी। इसके अंतर्गत कई कार्यों की रूपरेखा तैयार की गई और उसे धरातल पर उतारा गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाते हुए स्वयं इसकी पहल करते हुए झाडू लगाया था। इसके बाद तो मानों एक हवा सी चल गई। हरेक जगह नेता हो या सामाजिक कार्यकर्ता सभी स्वच्छता के इस मिशन पर मोदी के साथ दिखाई दिए।

स्वच्छ भारत अभियान के ही अंतर्गत घर-घर में शौचालय बनाने का भी लक्ष्य निश्चित किया गया है। ज्ञात हो कि पहले गांवों में लोग घरों से बाहर खेतों में शौच को जाते थे। इस कारण से गंदगी बढ़ रही थी। वहीं लोगों में संक्रमण का खतरा भी बना रहता था। महिलाओं के लिए यह समस्या और कठिन थी। गर्भवती महिलाएं, मासिक धर्म से गुजरनेवाली महिलाए , बुर्जग महिलाएं या बच्चियां हो उनके लिए बाहर शौच में जाना स्वच्छता और सुरक्षा दोनों ही नजरिए से घातक रहा है। यही कारण है कि केंद्र सरकारों ने घर-घर शौचालय बनाने की दिशा में प्रयास किया है। हालांकि जनता की सोच के कारण यह पूर्ण रूप से सफल नहीं हो पा रहा है। स्वच्छ भारत के लिए पंचायत स्तर पर भी अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन संपूर्ण स्वच्छता अभी दूर की कौड़ी लगती है। आवश्यकता है स्वच्छता के अभियान की धुन गांव-गांव तक पहुंचाने की जिससे लोग इसके बारे में जान सके।

वर्तमान समय में जब ‘कोरोना वायरस’ महामारी की तरह फैल रही है स्वच्छता का यह संकल्प प्रासंगिक लग रहा है। अब हमें अपने बुर्जगों द्वारा दी गई सीख बरबस हीं याद आ जाता है। वो सीख जो पश्चिमीकरण के प्रभाव और बढ़ते तथाकथित विकास के कारण भूल गए थे। अगर अपने बुर्जगों के द्वारा दी गई सीख पर हम पहले से ही अमल करते रहते तो शायद आज ‘कोरोना’ को लेकर हमें ‘रोना नहीं’ आता। आज हमें कोरोनों से बचाव के तरीके जो बोझिल लग रहे हैं वे हमारे लिए आदत बन चुके होते। अब समय आ गया है कि भारत की जनता केंद्र सरकार के साथ मिलकर स्वच्छता के लिए चलाए जा रहे अभियान के साथ हमेशा जुड़े रहे और स्वस्थ रहे।

11 

Share


S
Written by
Sakshi Sharma

Comments

SignIn to post a comment

Recommended blogs for you

Bluepad